नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026/ विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता की। वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी को और मजबूत बनाने तथा आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और विशेष संबंधों को और अधिक व्यापक एवं मजबूत बनाने की दिशा में यह वार्ता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विकास सहयोग वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की व्यापक समीक्षा की। बातचीत में विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और निवेश, संपर्क व्यवस्था तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इसके अलावा आपसी हित और महत्व से जुड़े अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भारत और भूटान के बीच विकास सहयोग दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। भूटान की विकास प्राथमिकताओं और उसकी पंचवर्षीय योजनाओं में भारत की भागीदारी लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता के माध्यम से दोनों पक्षों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विकास की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर विचार किया तथा सहयोग के संभावित क्षेत्रों को लेकर चर्चा आगे बढ़ाई।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अपनी यात्रा के दौरान भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच विशेष और घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। भारत और भूटान के बीच राजशाही स्तर पर भी लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास एवं सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख विशेषता माना जाता है।
विदेश सचिव ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे से भी भेंट की। बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और विकास साझेदारी को नई गति देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योनपो डी. एन. ढुंग्येल से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी हित के विषयों और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
वार्ता में ऊर्जा क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख हिस्सा रहा है। दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं और भविष्य में साझेदारी को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। इसी प्रकार व्यापार और निवेश के क्षेत्र में संबंधों को विस्तार देने तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया गया।
संपर्क व्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना भी वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क और आपसी संवाद को बढ़ावा देने से द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और जनस्तरीय संबंधों को भी दोनों देशों की मैत्री का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
वार्ता के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर आपसी महत्व के विषयों पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
भारत और भूटान के बीच मजबूत विश्वास, साझा हितों और पारस्परिक सम्मान पर आधारित संबंधों को देखते हुए विदेश सचिव की यात्रा और विकास सहयोग वार्ता को द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता से दोनों देशों के बीच विकास, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, संपर्क और जनस्तरीय संबंधों के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने का मार्ग और मजबूत होने की उम्मीद है।
