पीओजेके की स्थिति पर 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की

लंदन/नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026/ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में बिगड़ती स्थिति को लेकर 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतरेस से हस्तक्षेप की मांग की है। सांसदों ने क्षेत्र में हिंसा और नागरिकों के खिलाफ कथित कार्रवाई पर चिंता जताते हुए नागरिकों की सुरक्षा, संचार व्यवस्था बहाल करने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।

21 अगस्त को भेजे गए पत्र का नेतृत्व ब्रैडफोर्ड ईस्ट से सांसद और ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर के अध्यक्ष इमरान हुसैन ने किया। पत्र में सांसदों ने पीओजेके में हाल के महीनों के दौरान सामने आई मौतों और घायलों की खबरों, संचार प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा तथा शांतिपूर्ण नागरिक एवं राजनीतिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों को गंभीर चिंता का विषय बताया। सांसदों ने कहा कि ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरी परिवार भी क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से पीओजेके में जारी तनाव को कम करने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय प्रयास करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए जवाबदेही, संवाद और नागरिक अधिकारों का सम्मान आवश्यक है। सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र के संबंधित निकायों से नागरिकों की जान बचाने और आगे होने वाली हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी पहल करने की मांग की है।

पत्र में संचार सेवाओं तक पहुंच बहाल करने और उसे सुरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है। सांसदों ने भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की। इसके साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों से मनमानी गिरफ्तारियां रोकने, गिरफ्तार लोगों को उचित कानूनी प्रक्रिया और कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराने तथा नागरिक स्वतंत्रताओं का सम्मान करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया गया है।

सांसदों ने पीओजेके में स्वतंत्र मानवाधिकार पर्यवेक्षकों और शांतिपूर्ण मध्यस्थता में सहयोग करने वाली संस्थाओं को उचित पहुंच उपलब्ध कराने की मांग भी की। उनका कहना है कि क्षेत्र में हुई मौतों, चोटों और कथित रूप से जरूरत से अधिक बल प्रयोग की घटनाओं की निष्पक्ष और पूर्ण जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क भी पीओजेके की स्थिति पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण और समावेशी राजनीतिक संवाद, इंटरनेट तक पूर्ण पहुंच, अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता तथा अशांति के दौरान हुई मौतों की त्वरित, गहन और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।

ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहले व्यक्त की गई चिंताओं का स्वागत करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल बयान पर्याप्त नहीं हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि स्थायी स्थिरता प्रतिबंधों और टकराव से नहीं, बल्कि सार्थक संवाद से हासिल की जा सकती है, जिसमें क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और उनकी वैध चिंताओं को सुना जाए।

इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पूर्व में ब्रिटिश सांसदों की कुछ टिप्पणियों को अवांछित बताते हुए कहा था कि आजाद जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान का संप्रभु क्षेत्र है और वहां शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति तथा लोकतांत्रिक भागीदारी के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाता है। पाकिस्तान ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को स्वीकार्य नहीं बताया है।

ब्रिटिश सांसदों की ताजा अपील से पीओजेके की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है। सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकारों की निगरानी, जवाबदेही और शांतिपूर्ण राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।

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