नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 13 दिनों के भीतर मलेरिया से पांच लोगों की मौत की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि कांकेर जिले में 28 जुलाई 2026 को एक 11 वर्षीय बच्चे की मौत के साथ ही 13 दिनों के भीतर मलेरिया से मरने वालों की संख्या पांच हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे की प्रारंभिक जांच एक निजी प्रयोगशाला में कराई गई थी, जिसमें मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बाद जब बच्चे की तबीयत अधिक बिगड़ने लगी तो उसे अलबेलापारा स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आयोग के मुताबिक, अस्पताल में बच्चे की रक्त जांच कराई गई। हालांकि, जब तक जांच रिपोर्ट सामने आई और उसमें मलेरिया की पुष्टि हुई, तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। इस घटना ने क्षेत्र में मलेरिया की रोकथाम, समय पर जांच और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है। आयोग ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि बीमारी की समय पर पहचान और उपचार नहीं होने के कारण लोगों की जान गई। आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए मामले की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कांकेर जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों और मौतों के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज कर दिया है। 31 जुलाई 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर लोगों की मलेरिया जांच कर रही हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव, बीमारी के लक्षणों और समय पर उपचार कराने को लेकर जागरूक किया जा रहा है।

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत लोगों की जांच के साथ बीमारी की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया के मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कांकेर में हुई मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और बीमारी की निगरानी को लेकर आयोग की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति क्या थी, मलेरिया की जांच और उपचार की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी तथा मौतों को रोकने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कदम उठाए गए। अब राज्य सरकार की विस्तृत रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
