नई दिल्ली, 04 अगस्त 2026। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रशासनिक न्याय सुशासन का अभिन्न अंग है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाना तथा प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षता का निरंतर सुधार सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक संस्थानों को अधिक पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए लगातार शासन सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
नई दिल्ली में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत वसंतराव मोरे से मुलाकात के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। इस दौरान न्यायाधिकरण की ओर से संस्थागत सुधारों, व्यापक पहुंच और प्रौद्योगिकी आधारित सेवा वितरण के माध्यम से प्रशासनिक न्याय को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।

बैठक में न्यायाधिकरण के कामकाज और अब तक की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि अपनी स्थापना के बाद से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को निर्णय के लिए 10 लाख से अधिक मामले प्राप्त हुए हैं। इनमें से 9.32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। यह उपलब्धि प्रशासनिक विवादों के समयबद्ध समाधान और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह को न्यायाधिकरण की डिजिटल सेवाओं और तकनीकी आधुनिकीकरण के क्षेत्र में हुई प्रगति की भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि एडवांस्ड केस इंफॉर्मेशन सिस्टम के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सरल और सुलभ बनाने के लिए कई डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन डिस्प्ले बोर्ड, एसएमएस और ई-मेल अलर्ट तथा अदालती फीस के ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इन डिजिटल पहलों का उद्देश्य न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ मामलों की निगरानी और सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इससे संबंधित पक्षकारों को न्यायाधिकरण की कार्यवाही और मामलों की स्थिति की जानकारी डिजिटल माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो रही है।
बैठक में प्रशासनिक न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग और संस्थागत सुधारों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक न्याय को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर सेवा वितरण व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को पारदर्शी, कुशल और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा डिजिटल तकनीक के माध्यम से किए जा रहे सुधारों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाओं से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल रही है। वहीं ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से प्रशासनिक न्याय तक लोगों की पहुंच भी बेहतर हो रही है।
बैठक में प्रशासनिक न्याय को सुशासन के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए संस्थागत क्षमता बढ़ाने, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और सेवा वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया।
