फरीदाबाद, 7 सितंबर 2026। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए वह दिन दूर नहीं, जब सार्वजनिक सेवाओं और नेतृत्व के क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक होगी।
ओम बिरला फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘लिंग-उत्तरदायी शासन’ विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन कर रहे थे। कार्यशाला में 20 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 200 महिला विधायकों ने भाग लिया।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब महिलाओं के लिए केवल सहायता और अवसर उपलब्ध कराने तक सीमित रहने के बजाय उन्हें नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों और नीतियों के निर्माण में भागीदारी करनी चाहिए, जो उनकी चिंताओं, जरूरतों और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए कई विधायी कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे महिलाओं से जुड़ी उभरती चुनौतियों की पहचान करने और उनके समाधान का रास्ता तैयार करने में मदद करती हैं।
बिरला ने कहा कि लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। वे यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि कानून और सरकारी योजनाएं जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप तैयार हों और उनका लाभ जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है। ऐसे में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता। प्रत्येक महिला को रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
लोकसभा अध्यक्ष ने महिला विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सफल कार्यों और प्रभावी पहलों को साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सफल प्रयोगों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करके उन्हें देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
उन्होंने महिलाओं में उनके अधिकारों, कानूनों और उपलब्ध संस्थागत तंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बिरला ने कहा कि महिलाओं को यह जानकारी होनी चाहिए कि अपनी समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए वे किन संवैधानिक और कानूनी संस्थाओं का सहारा ले सकती हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि महिलाएं स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तक भारत के परिवर्तन की प्रक्रिया में हमेशा अग्रणी रही हैं। महिला विधायकों के लिए इस तरह की कार्यशालाएं उनके अनुभवों, विचारों और दृष्टिकोणों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच हैं।
उन्होंने कहा कि जीवंत लोकतंत्र में संवाद और निरंतर विचार-विमर्श बेहद जरूरी है। महिलाओं के नेतृत्व की प्रमुख ताकत संवेदनशीलता है, जो लोगों की समस्याओं को गहराई से समझने और उनके प्रभावी समाधान खोजने में मदद करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निरंतर प्रयासों से महिलाएं राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से नेतृत्व की भूमिका में आगे आएंगी।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर, हरियाणा सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के राज्य मंत्री राजेश नागर सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायक उपस्थित रहीं।
