राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन-2026 में मनसुख मंडाविया ने पारदर्शी चयन और खिलाड़ी-केंद्रित खेल प्रशासन पर दिया जोर

नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) सम्मेलन-2026 में खेल प्रशासन में पारदर्शिता, खिलाड़ियों के हितों की सर्वोच्च प्राथमिकता और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा खेल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां प्रत्येक खिलाड़ी को निष्पक्ष अवसर मिले और किसी भी खिलाड़ी के साथ अन्याय न हो।

सम्मेलन की अध्यक्षता मनसुख मंडाविया ने की। इसमें युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के अधिकारी और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य खेल प्रशासन को मजबूत करना, खिलाड़ियों के कल्याण को बढ़ावा देना और आगामी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा करना था।

बैठक में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के तहत राष्ट्रीय खेल महासंघों की अनुपालन स्थिति, खेल निकायों में सुशासन की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और एशियाई खेल 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 तथा राष्ट्रमंडल खेल 2030 की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मनसुख मंडाविया ने कहा कि खेल व्यवस्था से जुड़े सभी हितधारकों की पहली प्राथमिकता खिलाड़ियों का हित और कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के साथ किसी भी स्तर पर अन्याय नहीं होना चाहिए। इसके लिए खेल संस्थाओं को जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चयन ट्रायल निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से आयोजित किए जाने चाहिए। खुले चयन ट्रायल को पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में कैमरे पर रिकॉर्ड करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया पर विश्वास कायम रहे।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेल विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को लगातार खेल के मैदान में बनाए रखना और देश में मजबूत लीग संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय खेल महासंघों से अपील की कि वे पूरे वर्ष खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं तैयार करें।

सम्मेलन में डोपिंग के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा हुई। मनसुख मंडाविया ने कहा कि खेलों से डोपिंग को समाप्त करने के लिए केवल खिलाड़ियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। डोपिंग से जुड़ी पूरी श्रृंखला, जिसमें निर्माण, आपूर्ति, उपलब्धता और उपयोग शामिल हैं, पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार डोपिंग रोधी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम कर रही है। पारदर्शी और मजबूत तंत्र के माध्यम से ही खेलों को डोपिंग मुक्त बनाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कोचिंग व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि देश में उत्कृष्ट भारतीय कोचों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाना चाहिए। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ कोचों के प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर भी समान ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और सक्षम कोच ही विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कोचिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ाना समय की मांग है।

राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन-2026 में खेल प्रशासन के मानकों को बेहतर बनाने, राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन और आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए भारत की तैयारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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