भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर पहुंचा, जापान भारत में एफडीआई का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए जापानी व्यवसायों से भारत में अपने निवेश और साझेदारियों को और गहरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान की क्षमताएं कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश मिलकर वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गोयल नई दिल्ली में जापानी प्रतिनिधिमंडल के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित रात्रिभोज को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि की साझा आकांक्षाओं पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
जापानी तकनीक और भारत के युवा कार्यबल का मेल
गोयल ने उत्तर प्रदेश को जापानी निवेश के लिए महत्वपूर्ण अवसरों वाला राज्य बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य की बड़ी और आकांक्षी आबादी, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और कुशल कार्यबल जापानी तकनीक एवं विशेषज्ञता को भारत के युवा कार्यबल और तेजी से बढ़ते बाजार से जोड़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण, कृषि, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा एवं रक्षा, हरित और नीली अर्थव्यवस्था तथा भारत की सभ्यतागत सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्र भारत-जापान सहयोग के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराते हैं।
10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य
गोयल ने जुलाई 2026 में दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान ने अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी का प्रभाव देश में जमीन पर दिखाई दे रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई की जापानी सहायता से विकसित मेट्रो प्रणालियां तथा आठ राज्यों में स्थापित 11 जापानी औद्योगिक टाउनशिप इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
भारत में 1400 से अधिक जापानी कंपनियां
गोयल के अनुसार, भारत में इस समय 1400 से अधिक जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें मोबिलिटी क्षेत्र में सुजुकी, टोयोटा और होंडा, इलेक्ट्रॉनिक्स में सोनी तथा इंजीनियरिंग क्षेत्र में हिताची और मित्सुबिशी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के मजबूत आधार और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को दर्शाते हैं।
उत्तर प्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएं
गोयल ने कहा कि भारत की तीसरी सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश में 90 लाख से अधिक एमएसएमई हैं और राज्य देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा और सीको एडवांस जैसी कंपनियां पहले से राज्य के औद्योगिक एवं विनिर्माण तंत्र में योगदान दे रही हैं।
उन्होंने जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, यमुना एक्सप्रेसवे और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) समर्थित पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे को राज्य की प्रमुख आर्थिक ताकतों में शामिल बताया। रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में 27 औद्योगिक क्लस्टर और विकसित हो रहे इकोसिस्टम भी जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

24 अगस्त से जापान दौरे पर जाएंगे गोयल
गोयल ने कहा कि भारत निवेश और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार सुधार कर रहा है। कारोबार सुगमता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बेहतर लॉजिस्टिक्स, बहु-माध्यम परिवहन और जापानी भाषा की क्षमताओं के विस्तार जैसे कदमों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और गति मिलेगी।
उन्होंने जापानी दर्शन ‘काइज़ेन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सुधार यात्रा भी निरंतर सुधार की भावना पर आधारित है। गोयल 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे, जहां वह दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए उच्चस्तरीय चर्चाओं में भाग लेंगे।
उन्होंने जापानी व्यवसायों से भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, को अपने विकास का प्रमुख केंद्र बनाने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि जापानी तकनीक, नवाचार और निवेश भारत के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
