वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों से युवाओं के साथ मजबूत और दीर्घकालिक वित्तीय संबंध बनाने का किया आह्वान
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 का समापन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के भविष्य को लेकर व्यापक विचार-विमर्श के साथ हुआ। सम्मेलन में सात प्रमुख विषयों पर चर्चा के बाद व्यावहारिक रणनीतियां और नवीन समाधान सामने आए।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं को अब ठोस परिणामों और समयबद्ध कार्ययोजनाओं में बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी वित्तीय संस्थानों से अपनी संस्थागत क्षमता को मजबूत करने, उभरते अवसरों की पहचान करने और देश की बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नई क्षमताएं विकसित करने का आह्वान किया।

युवाओं के लिए एक महीने का विशेष अभियान
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से 2 अक्टूबर 2026 से एक महीने का विशेष अभियान शुरू करने का अनुरोध किया। भारतीय बैंक संघ के समन्वय से चलाए जाने वाले इस अभियान का उद्देश्य औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने वाले युवाओं के साथ बैंकों का संपर्क मजबूत करना है।
इस पहल के तहत युवाओं के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म या एप्लीकेशन विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को बैंकिंग सेवाओं के साथ शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़े वित्तीय अवसरों की सरल एवं उपयोगी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।
अभियान को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य युवा-केंद्रित परिसरों में सीधे पहुंच के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को युवाओं के जीवन के विभिन्न चरणों में उनकी जरूरतों को समझते हुए दीर्घकालिक संबंध विकसित करने चाहिए। शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, निवेश और संपत्ति निर्माण के साथ बदलती वित्तीय जरूरतों को पूरा करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य होगा।

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण पर विशेष जोर
सम्मेलन में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण यानी पीएसएल को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया गया। वित्त मंत्री ने बैंकों से व्यक्तिगत लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों की उपलब्धि पर कड़ी निगरानी रखने को कहा। उन्होंने उभरती कमियों की जल्द पहचान और उपयुक्त व्यावसायिक रणनीति के जरिए लक्षित लाभार्थियों तक वास्तविक एवं उत्पादक ऋण पहुंचाने पर जोर दिया।
कृषि और बागवानी क्षेत्र में वित्तपोषण बढ़ाने की रणनीति
सम्मेलन के दूसरे दिन कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला के बुनियादी ढांचे पर विशेष चर्चा हुई। इसमें किसान उत्पादक संगठनों, भंडारण, प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और बाजार संपर्क से जुड़े क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाने के अवसरों की पहचान की गई।
निजी क्षेत्र के अनुभवों को भी चर्चा में शामिल किया गया। वीएनआर ग्रुप के निदेशक सीए अरविंद अग्रवाल और टॉय जोन के निदेशक संजय मेहंदिरत्ता ने कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखला और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए रूप में विकसित करने पर जोर
क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए सिरे से विकसित करने पर भी विचार हुआ। इसमें डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मौजूदा ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं उपलब्ध कराने और रुपे-यूपीआई एकीकरण से मिलने वाले अवसरों का बेहतर इस्तेमाल करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने कहा कि सम्मेलन ने सातों विषयों पर प्राथमिकताओं की पहचान और स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने में मदद की है। अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों को स्पष्ट जिम्मेदारी और यथार्थवादी समयसीमा के साथ इन रणनीतियों को लागू करना होगा।
पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 में सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी वित्तीय संस्थानों और विशेषज्ञों की सामूहिक क्षमताओं को एक मंच पर लाया गया। सम्मेलन से निकली रणनीतियों को अब संबंधित संस्थानों की ओर से आगे की कार्रवाई और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए जमीन पर उतारा जाएगा। सरकार का मानना है कि विकसित भारत 2047 की दिशा में सार्वजनिक और निजी वित्तीय संस्थान वित्तीय समावेशन बढ़ाने, नए अवसरों के लिए वित्त उपलब्ध कराने और देश की आर्थिक विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
