रायपुर। संभावित बाढ़ और अन्य आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को रायपुर में करीब पांच घंटे का मॉक ड्रिल आयोजित किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल पर मंदिर हसौद तहसील के ग्राम परसदा स्थित सेंध लेक में आयोजित इस अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों की राहत एवं बचाव तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान आपदा की तीन अलग-अलग परिस्थितियां निर्मित कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। पहली स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों और पशुओं के फंसे होने की स्थिति बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया गया। दूसरी स्थिति में बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त भवन में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया परखी गई। वहीं तीसरी स्थिति में सड़क दुर्घटना के बाद एलपीजी टैंकर से गैस रिसाव होने की स्थिति निर्मित कर राहत, बचाव और सुरक्षा व्यवस्था का अभ्यास किया गया।

अभ्यास में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, रेलवे, जिला प्रशासन सहित विभिन्न विभागों की टीमें शामिल हुईं। एलपीजी टैंकर से गैस रिसाव की स्थिति में फायर ब्रिगेड और संबंधित टीमों ने मौके पर पहुंचकर रिसाव को नियंत्रित करने तथा टैंकर को सुरक्षित स्थान पर हटाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
सेंध लेक के बीच बने टापू पर फंसे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालने और मेडिकल टीम की सहायता से उन्हें अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का भी परीक्षण किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान शहीद वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम को राहत केंद्र बनाया गया, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चिकित्सा एवं राहत व्यवस्था संभाली।
बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता पर जोर
अधिकारियों के अनुसार, मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, टीमवर्क और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता सुनिश्चित करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को बिना देरी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
इस तरह के अभ्यास से आपदा प्रबंधन की तैयारियों में मौजूद संभावित कमियों और चुनौतियों की पहचान करने तथा उन्हें समय रहते दूर करने में मदद मिलती है। मॉक ड्रिल के माध्यम से जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ सहित अन्य आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र का परीक्षण किया।
अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में जनहानि को न्यूनतम रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी और प्रभावी ढंग से संचालित करना तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना रहा।
