रायपुर, 21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और मनोरंजन जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात कलाकार एवं तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. आनंदसिंह चौहान को उनकी बहुमूल्य सेवाओं के सम्मान में ‘वर्ल्ड कल्चरल एंड एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन’ द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित उपाधि 20 अगस्त 2026 को दिल्ली में प्रदान की गई। यह सम्मान केवल डॉ. आनंदसिंह चौहान की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, लोक परंपरा और मीडिया तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश की प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
डॉ. आनंदसिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ने के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनका सफर कला, मनोरंजन, मीडिया और तकनीकी क्षेत्र में निरंतर नवाचार एवं योगदान से जुड़ा रहा है।
छत्तीसगढ़ी ऑडियो-वीडियो जगत में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. चौहान ने वर्ष 2004 से 2010 तक ‘सुमन ऑडियो वीडियो’ सहित ‘वीडियो वर्ल्ड’, ‘एसजी कैसेट’ और ‘के.के. कैसेट’ जैसी छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित ऑडियो-वीडियो कंपनियों के साथ मुख्य सहयोगी के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ी कला और मनोरंजन सामग्री को तकनीकी रूप से बेहतर मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पहले 24 घंटे चलने वाले मनोरंजन चैनल की स्थापना में निभाई अहम भूमिका
छत्तीसगढ़ के पहले 24 घंटे चलने वाले मनोरंजन चैनल ‘ग्रैंड यारा’ की स्थापना में डॉ. आनंदसिंह चौहान ने टेक्निकल डायरेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाई। इस पहल ने प्रदेश के मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र को नई दिशा देने में योगदान दिया।
पहले डिजिटल प्रोडक्शन हाउस की स्थापना
छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक के शुरुआती दौर में उन्होंने राज्य के पहले डिजिटल प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की। कला और तकनीक के क्षेत्र में उनके इस योगदान को छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा ‘कला रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।
कला से तकनीक तक बहुआयामी योगदान
डॉ. आनंदसिंह चौहान ने ‘चली आ मा बम्लेश्वरी’, ‘वरदान मा बम्लेश्वरी’, ‘गणेश के पापा’, ‘नाथु का दादा’, ‘झूमे दिया सारी बमलेशरी के मंदिर में’ तथा ‘माया के गांव माया के छांव’ जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में निर्देशन, अभिनय, कैमरा और संपादन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
उनकी कार्यशैली की विशेषता यह रही है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की स्थानीय कला, भाषा, लोक संस्कृति और मनोरंजन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच देने में मदद मिली।

दिल्ली में सम्मान, छत्तीसगढ़ के लिए गौरव
डॉ. आनंदसिंह चौहान को प्रदान की गई मानद डॉक्टरेट उपाधि उनकी वर्षों की कला-साधना, तकनीकी दक्षता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण मान्यता है। दिल्ली में मिला यह सम्मान केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति, प्रतिभा और मीडिया तकनीक की पहचान का सम्मान है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में विशेष महत्व रखती है, जब छत्तीसगढ़ अपनी लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डॉ. आनंदसिंह चौहान की यह उपलब्धि प्रदेश के कलाकारों और युवा प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणादायी है।
पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का क्षण है कि प्रदेश की मिट्टी से जुड़े एक कलाकार और तकनीकी विशेषज्ञ की वर्षों की साधना को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सम्मान मिला। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति के बढ़ते प्रभाव तथा उसकी समृद्ध विरासत की पहचान को और मजबूत करता है।
