नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने प्रतिष्ठानों और नियोक्ताओं से कर्मचारी नामांकन अभियान 2026 का लाभ उठाने की अपील की है। इस विशेष एकमुश्त अभियान का उद्देश्य ऐसे पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाना है, जो पात्र होने के बावजूद निर्धारित अवधि में ईपीएफ कवरेज से बाहर रह गए थे। अभियान 1 जुलाई 2026 से प्रभावी है और 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा।
ईपीएफओ के अनुसार यह अभियान 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच ईपीएफ कवरेज से छूटे पात्र कर्मचारियों के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे कर्मचारी घोषणा की तारीख को जीवित होने के साथ संबंधित प्रतिष्ठान में कार्यरत होने चाहिए। इसका मकसद पिछली नामांकन संबंधी कमियों को स्वैच्छिक तरीके से नियमित करना और पात्र कर्मचारियों को वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है।
इस अभियान के माध्यम से कर्मचारियों को ईपीएफ के साथ पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। ईपीएफओ ने कहा है कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार संगठित रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने और श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान से उन प्रतिष्ठानों को भी अनुपालन नियमित करने का अवसर मिलेगा, जहां पात्र कर्मचारियों का नामांकन पहले नहीं हो पाया था।
सरकार ने नियोक्ताओं के लिए अभियान के तहत कुछ महत्वपूर्ण राहत भी उपलब्ध कराई है। यदि संबंधित अवधि में कर्मचारी का हिस्सा वेतन से काटा नहीं गया था, तो अभियान के तहत उस कर्मचारी के हिस्से का योगदान माफ किया जाएगा। वहीं नियोक्ता को अपने हिस्से का योगदान, लागू ब्याज और प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा। अभियान के तहत क्षतिपूर्ति के लिए प्रति प्रतिष्ठान 100 रुपये की एकमुश्त राशि निर्धारित की गई है।
नामांकन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती है। नियोक्ताओं को ईपीएफओ के एम्प्लॉयर पोर्टल के माध्यम से निर्धारित ऑनलाइन घोषणा दाखिल करनी होगी। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन आधारित यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन बनाने और इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न के माध्यम से योगदान जमा करने की सुविधा दी गई है। इससे कागजी कार्रवाई कम करने और नामांकन प्रक्रिया को तेज एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
ईपीएफओ देशभर में अभियान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और नियोक्ताओं के साथ संपर्क अभियान भी चला रहा है। विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से प्रतिष्ठानों को अभियान की समयसीमा और पात्रता संबंधी जानकारी दी जा रही है, ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा से वंचित न रहे।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल पुराने रिकॉर्ड को नियमित करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। ईपीएफ, पेंशन और बीमा से जुड़े लाभ कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ईपीएफओ ने प्रतिष्ठानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना पात्र कर्मचारियों की पहचान कर उनका नामांकन पूरा करें। 31 अक्टूबर 2026 के बाद अभियान की विशेष सुविधाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी और लागू कानून के तहत सामान्य अनुपालन एवं प्रवर्तन प्रक्रिया जारी रह सकती है।

इस अभियान को सरकार के ‘सामाजिक सुरक्षा सबके लिए’ के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। ईपीएफओ का कहना है कि नियोक्ताओं की स्वैच्छिक भागीदारी से अधिक से अधिक श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र में शामिल किया जा सकेगा और रोजगार व्यवस्था में पारदर्शिता तथा अनुपालन को भी मजबूती मिलेगी।
