नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026/ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को लागू कराने में सहयोग करने की अपील की है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने रविवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस यदि वास्तव में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के पक्ष में है तो उसे महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सहयोग करना चाहिए।
स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण की बात केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और उसके नेताओं से आग्रह किया कि वे संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने के प्रयासों का समर्थन करें और इसे वास्तविक रूप देने में सहयोग करें।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस विषय पर मिलकर आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार, महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका को व्यापक बनाना है।
भाजपा नेता ने कहा कि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और अब आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें विधायिका में भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि संसद और संविधान की गरिमा सभी राजनीतिक दलों के लिए सर्वोच्च होनी चाहिए। कोई भी राजनीतिक दल संसद या संविधान से बड़ा नहीं है। राष्ट्र की गरिमा और जनता की आवाज को हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल में पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की थी। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस से महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपने रुख को स्पष्ट करने और 33 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन का समर्थन करने को कहा।
स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण की वास्तविक कसौटी उनके राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। उन्होंने इस दिशा में सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा जताई। भाजपा का कहना है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने से नीतिगत निर्णयों में महिलाओं के दृष्टिकोण और अनुभवों को अधिक प्रभावी स्थान मिलेगा।
महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि इसके क्रियान्वयन से जुड़े परिसीमन और जनगणना जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं।
भाजपा ने अब कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों से इस विषय पर व्यापक सहमति बनाने और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की है। पार्टी का तर्क है कि महिला सशक्तीकरण को केवल चुनावी मुद्दा बनाने के बजाय इसे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के ठोस प्रयासों से जोड़ा जाना चाहिए।

स्मृति ईरानी ने दोहराया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, संविधान की सर्वोच्चता और जनता की आवाज राजनीतिक दलों के हितों से ऊपर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से सहयोगात्मक रवैया अपनाएंगे और महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
