नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। देश में जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय गोबरधन योजना आज से प्रभावी हो गई है। 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली यह राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी। केंद्र सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से घरेलू सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना और भारत के ऊर्जा मिश्रण में कम्प्रेस्ड बायोगैस को प्रमुख आधार बनाना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 6 अगस्त 2026 को गोबरधन योजना को मंजूरी दी थी। योजना को देश की जैविक संपदा को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद, ग्रामीण आय और आर्थिक मूल्य में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके तहत कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, गन्ने से निकलने वाला प्रेस मड, नगरपालिका का जैविक कचरा और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों का उपयोग कम्प्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन के लिए किया जाएगा।
सरकार ने सीबीजी क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के लिए योजना में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। इनमें सीबीजी की सुनिश्चित खरीद, लाभकारी एवं स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण सहायता और प्रौद्योगिकी विकास शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से सीबीजी संयंत्रों में निवेश के लिए एक मजबूत और पूर्वानुमानित वातावरण तैयार होगा।
गोबरधन योजना का एक प्रमुख उद्देश्य बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना भी है। सरकार के अनुसार सीबीजी उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यम विकसित हो सकते हैं और किसानों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। इससे जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ ‘कचरे से संपदा’ की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।
इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्वच्छ ऊर्जा के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद है। कृषि और पशुपालन से निकलने वाले जैविक अवशेषों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में होने से कचरे के निपटान की समस्या कम हो सकती है। साथ ही सीबीजी उत्पादन की प्रक्रिया से प्राप्त जैविक खाद का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में किया जा सकता है, जिससे जैविक संसाधनों का दोबारा उपयोग संभव होगा।
केंद्र सरकार ने गोबरधन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा है। घरेलू स्तर पर सीबीजी उत्पादन बढ़ने से वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी और देश में विकसित हो रहे जैव-ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। सरकार की योजना सीबीजी को आने वाले वर्षों में भारत के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख स्तंभ बनाने की है।
गोबरधन पहल की नींव पहले से चल रही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से तैयार की गई है। सरकार ने सीबीजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (SATAT), जैविक खाद के लिए मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस, बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी, पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत सहायता जैसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं। नई एकीकृत योजना इन प्रयासों को एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचे में आगे बढ़ाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि भारत का जैविक कचरा देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे, गांव स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के केंद्र बनें और किसान देश की ऊर्जा सुरक्षा में भागीदार बनें। 23,731 करोड़ रुपये के इस बड़े निवेश और एकीकृत नीति ढांचे के साथ गोबरधन योजना को भारत के स्वच्छ ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था अभियान में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
