तेहरान, 8 सितंबर 2026। ईरान सरकार ने पेट्रोल की खपत को नियंत्रित करने और बढ़ती सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए अधिक पेट्रोल खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर ईंधन की कीमत बढ़ा दी है। नई व्यवस्था के तहत एक महीने में 110 लीटर से अधिक पेट्रोल खरीदने पर उपभोक्ताओं को प्रति लीटर एक लाख रियाल का भुगतान करना होगा। यह दर पहले लागू कीमत की तुलना में लगभग दोगुनी है। दिसंबर 2025 के बाद ईंधन की कीमत में यह दूसरी बढ़ोतरी है।
ईरान में पेट्रोल लंबे समय से सरकार द्वारा भारी सब्सिडी वाला उत्पाद रहा है। देश में घरेलू पेट्रोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में काफी कम रही हैं। सरकार का तर्क है कि कम कीमतों के कारण पेट्रोल की खपत तेजी से बढ़ रही है, जबकि कमजोर होती राष्ट्रीय मुद्रा, सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ता वित्तीय दबाव सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
नई व्यवस्था का असर मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो निर्धारित मासिक सीमा से अधिक पेट्रोल खरीदते हैं। सरकार की ओर से 110 लीटर तक की खपत के लिए मौजूदा रियायती व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया गया है, जबकि इससे अधिक खरीद पर ऊंची दर लागू होगी। इससे सरकार को अत्यधिक ईंधन खपत को हतोत्साहित करने और पेट्रोल की बढ़ती मांग पर नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ईरान में पेट्रोल की खपत पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। बड़ी आबादी, वाहनों की संख्या में वृद्धि और लंबे समय से चली आ रही कम ईंधन कीमतों ने पेट्रोल की मांग को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। इसके साथ ही देश में ईंधन की तस्करी भी सरकार के लिए एक गंभीर समस्या रही है। पड़ोसी देशों में पेट्रोल की कीमत घरेलू कीमतों से काफी अधिक होने के कारण सस्ता ईंधन सीमा पार तस्करी का हिस्सा बनता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने का व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इससे पहले से ही ऊंची महंगाई का सामना कर रहे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ईरान की मुद्रा की कमजोर स्थिति ने भी घरेलू परिवारों की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है।
ईरान में महंगाई लंबे समय से बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है। खाद्य पदार्थों, आवास और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में वृद्धि ने आम परिवारों पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे माहौल में पेट्रोल की कीमत में वृद्धि सरकार के लिए आर्थिक रूप से जरूरी कदम हो सकता है, लेकिन सामाजिक स्तर पर इसके विरोध की आशंका भी बनी रहती है।
ईरान में ईंधन की कीमत राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा रही है। अतीत में पेट्रोल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। नवंबर 2019 में पेट्रोल की कीमत बढ़ाए जाने के बाद व्यापक प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद सरकार ने ईंधन मूल्य नीति में बदलाव करते समय सामाजिक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया को भी ध्यान में रखना शुरू किया।

सरकार का लक्ष्य ईंधन की खपत को अधिक तर्कसंगत बनाना, पेट्रोल की बर्बादी और तस्करी पर अंकुश लगाना तथा सब्सिडी के वित्तीय बोझ को कम करना है। हालांकि, कमजोर मुद्रा और महंगाई के बीच नई कीमतों का असर आम उपभोक्ताओं पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
