अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर व्यापक प्रतिबंध वाले विधेयक को दी मंजूरी, ट्रंप के पास पहुंचा बिल

वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय दबाव बढ़ाने वाले ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 262-159 मतों से मंजूरी दे दी है। विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। सीनेट इससे पहले अगस्त में 86-11 के भारी बहुमत से इस विधेयक को पारित कर चुकी है।

विधेयक का नाम दिवंगत दक्षिण कैरोलिना सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। इसका उद्देश्य रूस के अधिकारियों, बड़े कारोबारी समूहों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों तथा यूक्रेन युद्ध से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर प्रतिबंधों को और मजबूत करना है। इसमें रूस के तेल कारोबार में इस्तेमाल होने वाले ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहाजों को भी निशाना बनाया गया है।

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देना है। इसके तहत रूस के ऊर्जा संसाधनों के पांच सबसे बड़े आयातकों तथा रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले शीर्ष पांच देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

इस प्रावधान का भारत और चीन पर भी संभावित असर हो सकता है, क्योंकि दोनों देश रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों का आयात करते हैं। हालांकि विधेयक पारित होने का अर्थ यह नहीं है कि इन देशों पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। इसके लिए राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से आगे कार्रवाई की आवश्यकता होगी। कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रीय हित के आधार पर प्रतिबंधों और शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी विधेयक में रखा गया है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक के पक्ष में 262 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 159 सांसदों ने इसका विरोध किया। रिपोर्टों के अनुसार, 58 डेमोक्रेट सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि सात रिपब्लिकन सांसदों ने इसका विरोध किया। कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार दिए जाने पर चिंता जताई है।

इस विधेयक में ईरान से संबंधित प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने का प्रावधान शामिल है। ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों से संबंधित प्रतिबंधों की अवधि पांच वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। यह प्रावधान ट्रंप प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने विधेयक के समर्थन में अमेरिकी सांसदों से अपील की थी। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना उसके युद्ध संबंधी वित्तीय संसाधनों को सीमित करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि विधेयक के आलोचकों ने चेतावनी दी है कि व्यापक टैरिफ अधिकारों का इस्तेमाल अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों के साथ आर्थिक तनाव बढ़ा सकता है।

विधेयक के राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद कानून बनने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद रूस की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यापार और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क पर अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *