गांधीनगर, 15 सितम्बर 2026। विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का 10वां संस्करण गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में शुरू हो गया है। दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित हो रहे इस वैश्विक मंच का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने संयुक्त रूप से किया। 15 से 18 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में 65 से अधिक देशों के 2000 से ज्यादा हितधारक हिस्सा ले रहे हैं।
इस वर्ष फोरम का विषय ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था : लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव’ है। सम्मेलन का उद्देश्य संसाधनों के बेहतर उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुन: उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है। फोरम में नीति निर्माता, उद्योग जगत, स्टार्टअप, शोधकर्ता, नवोन्मेषक और अन्य विशेषज्ञ चक्रीय अर्थव्यवस्था को तेजी से अपनाने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा केवल आधुनिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुन: उपयोग, मरम्मत और संसाधनों के संरक्षण की परंपराएं भारतीय जीवन पद्धति का हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब इन परंपरागत दृष्टिकोणों को आधुनिक तकनीक, नीतियों और संस्थागत व्यवस्थाओं के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत है।
उन्होंने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। EPR व्यवस्था के तहत उत्पादकों की जिम्मेदारी को उत्पाद के इस्तेमाल के बाद उसके कचरे के प्रबंधन और पुनर्चक्रण तक विस्तारित किया गया है। सरकार का जोर ऐसे तंत्र पर है, जिसमें कचरे को बोझ के बजाय आर्थिक संसाधन के रूप में देखा जाए और पुनर्चक्रित सामग्री के लिए मजबूत बाजार विकसित किए जाएं।
फिनलैंड के राजदूत मिको किविकोस्की ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था को केवल पर्यावरण संरक्षण या अपशिष्ट प्रबंधन के विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह आर्थिक विकास, संसाधन दक्षता, नवाचार और रोजगार के अवसरों से भी जुड़ा व्यापक क्षेत्र है। उन्होंने भारत जैसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे देश की भूमिका को वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विकास, पारिस्थितिकी, समृद्धि और स्थिरता को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
फोरम के मुख्य कार्यक्रम में चार पूर्ण सत्र और 16 विषयगत सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित ऊर्जा, सतत वित्त, शासन, रोजगार, टिकाऊ उत्पाद और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा 125 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े व्यावहारिक और नवाचार आधारित समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं।

17 और 18 सितंबर को फोरम के तहत विभिन्न वैश्विक ‘एक्सेलेरेटर’ सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इस प्रकार गांधीनगर में हो रहा WCEF 2026 भारत के लिए न केवल पर्यावरणीय स्थिरता, बल्कि संसाधन दक्षता, नवाचार, निवेश और भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।
