पटना, 26 सितंबर 2026/ भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय प्रणाली को नागरिकों से मदद मांगने की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनेक पीड़ित अपने कानूनी अधिकारों से अनभिज्ञ होते हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि सहायता के लिए किस संस्था या अधिकारी से संपर्क किया जाए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पटना में देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र (Victim Rights Centre) के उद्घाटन अवसर पर यह बात कही।

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के परिसर में स्थापित यह केंद्र अपराध पीड़ितों को एक ही स्थान पर कानूनी सहायता और विभिन्न आवश्यक सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया है। इसे एकल-खिड़की व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है, ताकि पीड़ितों को अपनी समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों और संस्थाओं के चक्कर न लगाने पड़ें। केंद्र प्रत्येक मामले का एक रिकॉर्ड रखेगा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करते हुए सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
पीड़ित अधिकार केंद्र में कानूनी सहायता के साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग, परामर्श और आवश्यक मार्गदर्शन की व्यवस्था रहेगी। केंद्र का उद्देश्य पीड़ितों को प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जमानत, सुनवाई, निर्णय और अपील जैसे विभिन्न चरणों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों और सेवाओं तक पहुंच दिलाना है। जरूरत के अनुसार मुआवजा, चिकित्सा सहायता, संरक्षण तथा अन्य पुनर्वास संबंधी सेवाओं के लिए भी संबंधित संस्थाओं से समन्वय किया जाएगा।
इस व्यवस्था में मामलों की प्रगति के लिए निर्धारित समय-सीमा भी रखी जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पैनल अधिवक्ता की नियुक्ति 48 घंटे के भीतर किए जाने का प्रावधान है, जबकि आवश्यकता के अनुसार परामर्शदाता और केस वर्कर की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र पुलिस, अस्पतालों, बाल कल्याण समितियों, वन स्टॉप सेंटर और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ समन्वय करेगा, ताकि पीड़ित को कानून के तहत उपलब्ध सहायता समय पर मिल सके।
पीड़ित अधिकार केंद्र को फिलहाल पटना जिले में 12 महीने की पायलट परियोजना के रूप में संचालित किया जाएगा। इसके कामकाज और परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद इसे अन्य जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से विस्तार देने का प्रस्ताव है। यह परियोजना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत उपलब्ध विधिक सहायता व्यवस्था से जुड़ी है और मौजूदा संस्थागत संसाधनों के उपयोग के आधार पर संचालित की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन की भी शुरुआत की गई। यह हेल्पलाइन ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को पहचान प्रमाण-पत्र, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों तक विधिक सहायता सेवाएं पहुंचाने के लिए मल्टी यूटिलिटी वाहनों को भी हरी झंडी दिखाई गई।
इस पहल के माध्यम से न्यायिक व्यवस्था को अधिक पीड़ित-केंद्रित बनाने और कानूनी अधिकारों के साथ आवश्यक सहायता को एक समन्वित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। केंद्र की कार्यप्रणाली में समयबद्धता, समन्वय और मामले की निरंतर निगरानी पर विशेष जोर रहेगा, ताकि पीड़ितों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सहायता के लिए अलग-अलग संस्थाओं के बीच भटकना न पड़े।
