महाराष्ट्र में 13 नवंबर और दिल्ली में 25 नवंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावे-आपत्तियां, पांच राज्यों में 30 नवंबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के तहत पांच राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए समयसीमा में बदलाव किया है। आयोग ने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड के साथ दिल्ली में भी पुनरीक्षण प्रक्रिया की विभिन्न समय-सीमाएं बढ़ाई हैं। इस निर्णय के बाद मतदाताओं को अपने नाम, पते और अन्य विवरणों से संबंधित दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने तथा उनके निराकरण के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
निर्वाचन आयोग ने 29 अक्टूबर को जारी अलग-अलग निर्देशों में संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की मांग के आधार पर कार्यक्रम में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय में पूरा करना और पात्र मतदाताओं को अपने विवरण दुरुस्त कराने का पर्याप्त अवसर देना है।
आयोग के नए कार्यक्रम के अनुसार महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है। यहां प्राप्त दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 25 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद 30 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
नगालैंड में दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 25 नवंबर तक जारी रहेगी। आंध्र प्रदेश और हरियाणा में यह प्रक्रिया 20 नवंबर तक पूरी की जाएगी, जबकि तेलंगाना में दावों और आपत्तियों के निराकरण के लिए 26 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। इन पांचों राज्यों की अंतिम मतदाता सूचियों का प्रकाशन 30 नवंबर को किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए निर्वाचन आयोग ने अपेक्षाकृत अधिक समय दिया है। यहां दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है। पहले इनके निपटारे की प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दिया गया है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी।
क्या है एसआईआर प्रक्रिया?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूचियों को अद्यतन और अधिक शुद्ध बनाने के लिए संचालित की जाने वाली व्यापक प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत मतदाताओं के नाम, पते और पात्रता संबंधी विवरणों का सत्यापन किया जाता है। इसमें पात्र नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र या मृत व्यक्तियों के नाम हटाने तथा गलत प्रविष्टियों में सुधार की प्रक्रिया शामिल होती है।
इस प्रक्रिया में फॉर्म-6 के माध्यम से पात्र नए मतदाता नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म-7 का उपयोग नाम हटाने से संबंधित दावे या आपत्तियों के लिए और फॉर्म-8 का उपयोग मतदाता सूची में विवरणों के संशोधन अथवा स्थानांतरण के लिए किया जाता है।

निर्वाचन आयोग के इस फैसले से संबंधित राज्यों और दिल्ली के मतदाताओं को अपने मतदाता विवरण की जांच करने तथा आवश्यक सुधार कराने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। आयोग ने निर्धारित संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी कर अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित करने की तैयारी की है।
