वाशिंगटन। अमरीका ने भारत और 19 अन्य देशों से आयात होने वाली कुछ विशेष दवाओं और उनसे जुड़े औषधीय घटकों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ की व्यवस्था की है। अमरीकी वाणिज्य विभाग ने इसके लिए पात्र देशों और दवाओं की श्रेणियों की सूची फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित की है। यह व्यवस्था ऐसे समय में सामने आई है, जब अमरीका कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनके संबंधित घटकों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहा है।
अमरीकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, शून्य टैरिफ के दायरे में दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए निर्धारित दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित उपचार, बांझपन के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट जैसी विशेष दवाएं शामिल हैं। कुछ चिकित्सा आपात स्थितियों से संबंधित दवाओं तथा पशु स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं और उनके संबंधित घटकों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।
इस सूची में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, उत्तर मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टाइन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन देशों से आने वाले पात्र उत्पादों को शून्य प्रतिशत दर का लाभ मौजूदा या प्रस्तावित व्यापार एवं सुरक्षा समझौतों के आधार पर दिया जा सकता है।
यह निर्णय राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की 2 अप्रैल 2026 की उस घोषणा के तहत किए जा रहे उपायों का हिस्सा है, जिसमें पेटेंट वाली दवाओं, जैविक दवाओं और संबंधित औषधीय घटकों के आयात को लेकर शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया गया था। अमेरिकी प्रशासन ने इन उपायों का उद्देश्य दवाओं के घरेलू उत्पादन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देना बताया है। संबंधित प्रावधानों के तहत कुछ कंपनियों और उत्पादों पर शुल्क लागू करने की समय-सीमा अलग-अलग रखी गई है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य यानी जेनेरिक दवाएं और उनके संबंधित घटक फिलहाल इन सेक्शन 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के दायरे में नहीं हैं। इसके साथ ही विभाग ने ‘फार्मास्युटिकल आर्टिकल्स’ की परिभाषा को भी स्पष्ट किया है, जिसमें तैयार दवाएं, सक्रिय औषधीय घटक और ऐसे घटकों के प्रमुख प्रारंभिक पदार्थ शामिल हैं।
भारत के लिए यह निर्णय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारतीय दवा उद्योग अमरीकी बाजार में बड़ी मात्रा में दवाओं और औषधीय उत्पादों की आपूर्ति करता है। विशेष दवाओं की जिन श्रेणियों को शून्य टैरिफ में शामिल किया गया है, उनमें भारतीय कंपनियों के लिए भी अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने का अवसर रहेगा। हालांकि, यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं है और केवल अमेरिकी नियमों में निर्धारित पात्र उत्पादों तथा संबंधित घटकों तक सीमित है।

भारत-अमरीका व्यापार संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमरीका की यात्रा पर हैं और व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।
