सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति से कक्षा 6 के विद्यार्थियों को छूट देने पर विचार करने को कहा

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को कक्षा 6 के इस वर्ष के विद्यार्थियों को कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों की तरह तीन-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार तथा सीबीएसई की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वे कक्षा 6 के विद्यार्थियों को भी वही छूट दें, जो कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को दी गई है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितंबर को सीबीएसई से कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए 2027 से शुरू होने वाले अगले शैक्षणिक सत्र से भारतीय मूल की दो भाषाओं सहित तीन भाषाओं के अनिवार्य अध्ययन वाली अपनी नीति को लागू करने पर विचार करने को कहा था। न्यायालय ने यह सुझाव विद्यार्थियों को वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अतिरिक्त दबाव से बचाने और स्कूलों को आवश्यक व्यवस्था के लिए समय देने के संदर्भ में दिया था।

सीबीएसई के बयान के अनुसार, कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे वर्तमान विद्यार्थियों को कक्षा 10 में प्रवेश करने पर तीसरी भाषा में बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। ताजा सुनवाई में कक्षा 6 के विद्यार्थियों को भी इसी प्रकार की राहत देने पर विचार करने को कहा गया है।

सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि नवीनतम आंकड़ों के अनुसार लगभग 99 प्रतिशत विद्यालयों ने तीन भाषाओं के अध्ययन की नीति को अपनाया है और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 1.2 प्रतिशत विद्यालयों ने अभी इसे नहीं अपनाया है। अन्य रिपोर्टों में लगभग 98.8 प्रतिशत विद्यालयों के तैयार होने का आंकड़ा भी सामने आया है।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को इस नीति से छूट देने के पक्ष में अपनी स्थिति रखी और कहा कि विद्यार्थी वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से ही नई भाषा नीति का पालन कर सकते हैं। इसके बाद पीठ ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए नीति के कार्यान्वयन में राहत देने की आवश्यकता पर विचार करने को कहा।

न्यायमूर्ति बागची ने सुझाव दिया कि कक्षा 6 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए इसका कार्यान्वयन स्थगित किया जा सकता है, जिससे सीबीएसई को आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सके। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र से नीति लागू करने पर विद्यार्थियों और विद्यालयों को तैयारी का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

यह विवाद सीबीएसई के अपने पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2023 के अनुरूप बनाने के निर्णय से संबंधित है। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं के अध्ययन का प्रावधान किया गया है। सीबीएसई की योजना के अनुसार विदेशी भाषा का विकल्प तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में लिया जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले में मुख्य मुद्दों में नीति के क्रियान्वयन की समय-सीमा, विद्यालयों में उपलब्ध भाषायी शिक्षक और अन्य आधारभूत सुविधाएं तथा विद्यार्थियों पर पड़ने वाला शैक्षणिक भार शामिल हैं। न्यायालय ने पहले भी कहा था कि नीति लागू करने में विद्यार्थियों की सुविधा और आवश्यक संसाधनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

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