जी-7 देशों ने वैश्विक ईंधन बाजार में बढ़ती कीमतों और डीजल की तंग आपूर्ति से निपटने के लिए आपात तेल भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है। यह आपूर्ति अगले चार महीनों के दौरान की जाएगी और शुरुआती 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा जारी करने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में हुई जी-7 नेताओं की बैठक में वैश्विक ऊर्जा बाजार और विशेष रूप से डीजल की आपूर्ति पर चर्चा हुई। बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत जी-7 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आईईए के अनुसार, मध्य-पूर्व में जारी संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों का असर खास तौर पर डीजल बाजार पर पड़ा है।
आईईए के मुताबिक, मार्च में घोषित 40 करोड़ बैरल के सामूहिक आपात भंडार रिलीज में से अब तक करीब 32.5 करोड़ बैरल जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है और डीजल बाजार में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
अमेरिका में डीजल की कीमतें सितंबर के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचीं। वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव के कारण ईंधन बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। आईईए की सितंबर रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में वैश्विक तेल भंडार में करीब 9.5 करोड़ बैरल की कमी दर्ज की गई थी।
जी-7 के ताजा फैसले का उद्देश्य बाजार में तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर ऊर्जा बाजार में दबाव कम करना और आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करना है।
