भारत-उत्तर मैसिडोनिया के आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
दोनों देशों के कारोबारी संगठनों को लाभकारी परियोजनाओं की पहचान कर दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध बनाने की दिशा में पहल करनी चाहिए
स्कोप्ये, 21 जुलाई 2026। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को स्कोप्ये में आयोजित भारत-उत्तर मैसिडोनिया व्यापार मंच को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तर मैसिडोनिया गणराज्य की राष्ट्रपति गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा, उत्तर मैसिडोनिया सरकार के सदस्य, भारत और उत्तर मैसिडोनिया के प्रमुख कारोबारी तथा दोनों देशों के उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि उत्तर मैसिडोनिया की यह यात्रा किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच साझा हित वाले सभी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के प्रति भारत की गहरी रुचि को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत और उत्तर मैसिडोनिया के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध एक ऐसा नया क्षेत्र है, जिसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान व्यापारिक स्तर उन व्यापक संभावनाओं का केवल एक छोटा हिस्सा है, जिन्हें अभी हासिल किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों को एक-दूसरे के यहां निवेश बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मास्युटिकल्स एवं स्वास्थ्य सेवा, कृषि प्रसंस्करण और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। राष्ट्रपति ने उत्तर मैसिडोनिया को अगले वर्ष भारत में आयोजित होने वाले वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दोनों देशों के स्टार्टअप, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्योग जगत को आगे बढ़कर ऐसी लाभकारी परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए, जो लंबे समय तक चलने वाले व्यापारिक और आर्थिक संबंधों की मजबूत नींव तैयार कर सकें। इसके लिए दोनों देशों के वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों, निवेश एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों के बीच नियमित संपर्क जरूरी है।
राष्ट्रपति ने व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आपसी दौरों को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कंपनियों से केवल तत्काल व्यापारिक सौदों तक सीमित रहने के बजाय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यम, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारियों में निवेश करने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-उत्तर मैसिडोनिया व्यापार मंच दोनों देशों के बीच नए विचारों और सहयोग की नई संभावनाओं को जन्म देगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच भारत और उत्तर मैसिडोनिया के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ दोनों देशों के उद्योग जगत के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकते हैं।
