नई दिल्ली। गन्ना किसानों की समस्याओं और उनके द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने किसानों की मांगों की जांच करने और उनसे जुड़े विषयों पर सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद इस समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति किसानों, चीनी उद्योग और राज्य सरकारों सहित सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सुझाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, समिति का गठन कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री की बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर किया गया है। बैठक में किसानों ने गन्ना उत्पादन, उसकी कीमत और चीनी उद्योग से संबंधित विभिन्न मुद्दे उठाए थे। इन समस्याओं पर विस्तार से विचार करने और संबंधित पक्षों के सुझावों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करने के लिए समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल
समिति में प्रोफेसर रमेश चंद अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव शामिल हैं। विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से गन्ना किसानों की समस्याओं का कृषि, चीनी उत्पादन, उपभोक्ता हित और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य में आकलन किया जा सकेगा।
समिति किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और संबंधित विशेषज्ञों सहित सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करेगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से किसानों की वास्तविक समस्याओं, चीनी मिलों की स्थिति और क्षेत्र की जरूरतों को समझकर उपयुक्त सुझाव तैयार किए जाएंगे।
गन्ना किसानों की आय और भुगतान प्रमुख मुद्दे
गन्ना किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य, चीनी मिलों की ओर से समय पर भुगतान, उत्पादन लागत में वृद्धि, खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। गन्ने की खेती में सिंचाई, उर्वरक, श्रम और परिवहन पर होने वाला खर्च किसानों की आय को प्रभावित करता है। वहीं, चीनी की कीमतों और मिलों की वित्तीय स्थिति का असर गन्ना खरीद तथा किसानों के बकाया भुगतान पर भी पड़ सकता है।
गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसके अतिरिक्त कुछ राज्यों में राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) भी लागू होता है। ऐसे में किसानों की मांगों पर विचार करते समय केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों, उत्पादन लागत तथा चीनी क्षेत्र की आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
विचार-विमर्श के बाद सामने आएंगे समाधान
समिति विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किसानों की समस्याओं का अध्ययन करेगी। इसका उद्देश्य गन्ना किसानों के हितों की रक्षा करने, उनकी आय को बेहतर बनाने और चीनी उद्योग की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना है।

समिति की सिफारिशों और उनके आधार पर सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, समिति का गठन गन्ना किसानों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर विचार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
