तिरुवनंतपुरम सम्मेलन में संसद और राज्यों की लोक लेखा समितियों ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय, ऑडिट आपत्तियों के निपटारे के लिए तय होगी समय-सीमा
हर महीने कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने पर जोर, डिजिटल पोर्टल और ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की पहल
कैग के साथ मजबूत होगा समन्वय, वित्तीय अनियमितताओं और शासन के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए उन्नत तकनीक का होगा उपयोग
तिरुवनंतपुरम, 04 नवंबर 2026/ देश में सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत बनाने की दिशा में संसद तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों ने महत्वपूर्ण पहल की है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में 3 और 4 नवंबर को आयोजित लोक लेखा समितियों के सभापतियों के सम्मेलन में सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग, सरकारी खर्चों की निगरानी, ऑडिट व्यवस्था में सुधार और सुशासन को लेकर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन के समापन पर सभी समितियों ने एक महत्वपूर्ण संकल्प पारित किया, जिसमें लोक लेखा समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की गई।
इस संकल्प का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा जनता के कल्याण और विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का उपयोग निर्धारित कानूनी प्रावधानों और उद्देश्यों के अनुरूप ही हो। इसके लिए लोक लेखा समितियां सार्वजनिक धन के वितरण और व्यय की गहन जांच करेंगी तथा यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकारी खजाने का उपयोग निर्धारित सेवा और उद्देश्य के लिए ही किया जाए।
लोक लेखा समितियों के बीच बनेगा डिजिटल संवाद मंच
सम्मेलन में संसद और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की लोक लेखा समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित करने का संकल्प लिया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से सभी समितियां एक-दूसरे के अनुभव, कार्यप्रणाली, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और नए प्रयोगों की जानकारी साझा कर सकेंगी। इससे विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों को अन्य समितियों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।
ऑडिट आपत्तियों के निपटारे के लिए तय होगी समय-सीमा
सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों और लोक लेखा समितियों की सिफारिशों पर संबंधित विभागों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्रवाई रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और लंबे समय से लंबित ऑडिट आपत्तियों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लोक लेखा समितियों में ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी डिजिटल निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनी। इसके माध्यम से ऑडिट संबंधी टिप्पणियों, विभागीय जवाबों और उन पर की गई कार्रवाई की स्थिति पर नियमित नजर रखी जा सकेगी।
हर महीने तीन बैठकें और उप-समितियों के गठन पर जोर
लोक लेखा समितियों के कामकाज को अधिक सक्रिय बनाने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की समितियों में प्रत्येक महीने कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने पर विचार करने का संकल्प लिया गया। इसके अलावा आवश्यकतानुसार उप-समितियों का गठन करने पर भी जोर दिया गया, ताकि लंबित ऑडिट टिप्पणियों की गहराई से जांच कर समय पर निर्णय लिए जा सकें।
प्रशिक्षण और तकनीकी विशेषज्ञता से मजबूत होंगी समितियां
सम्मेलन में लोक लेखा समिति सचिवालयों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समिति के सदस्यों को जटिल वित्तीय और तकनीकी विषयों की जांच के लिए आवश्यक विश्लेषणात्मक उपकरण तथा विशेषज्ञ सहयोग उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।
कैग के साथ बढ़ेगा समन्वय, फोरेंसिक तकनीक का होगा उपयोग
सरकारी खर्चों की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के कार्यालय के साथ सहयोग बढ़ाने का निर्णय भी संकल्प में शामिल है। उन्नत फोरेंसिक उपकरणों और डिजिटल तकनीकों की मदद से शासन के उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां वित्तीय अनियमितताओं या जोखिम की आशंका अधिक है और जिन पर तत्काल विधायी निगरानी की आवश्यकता है।
सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि डिजिटल समाधानों का उपयोग करते समय विधायिका की स्थापित प्रक्रियाओं की अखंडता और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।

संसद तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के सभापतियों और सदस्यों ने 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में इस संकल्प को अपनाया। यह पहल देश में सार्वजनिक धन के बेहतर प्रबंधन, सरकारी व्यय की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
