केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3,788 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को दी मंजूरी, 850 विशेष अदालतें करेंगी काम
वर्तमान 779 अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी, अब तक 4.02 लाख से अधिक मामलों का हो चुका है निपटारा
महिलाओं और बच्चों को मिलेगा त्वरित न्याय, प्रत्येक अदालत में न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी होंगे तैनात
नई दिल्ली, 04 नवंबर 2026/ महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और बच्चों के साथ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए संचालित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी।
इस योजना के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी 1,434.89 करोड़ रुपये होगी। केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि निर्भया फंड से उपलब्ध कराएगी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों का तेजी से निपटारा करना तथा पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है।
779 से बढ़कर 850 होंगी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें
योजना के तहत वर्तमान में देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 779 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें संचालित हैं। इनमें 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। नई अदालतों की स्थापना उन जिलों में की जाएगी, जहां दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों की संख्या अधिक है। इससे अधिक जिलों के पीड़ितों को अपने क्षेत्र में ही त्वरित न्याय की सुविधा मिल सकेगी।
हर अदालत में होंगे विशेष न्यायिक अधिकारी और अभियोजक
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों में मामलों की सुनवाई के लिए एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और सुनवाई के दौरान प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी। योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अदालतों के संचालन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
अब तक 4.02 लाख से अधिक मामलों का निपटारा
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत दर्ज मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक इन विशेष अदालतों के माध्यम से 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उच्चतम न्यायालय ने भी 25 जुलाई 2019 को अपने निर्देश में पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित करने पर जोर दिया था।
बच्चों के अनुकूल होंगे न्यायालय, पीड़ितों की गोपनीयता और सुविधा पर जोर
योजना में केवल मामलों के शीघ्र निपटारे पर ही नहीं, बल्कि पीड़ितों के अनुकूल न्यायिक वातावरण तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत बच्चों के अनुकूल न्यायालय परिसर और कमजोर गवाह बयान केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि पीड़ित बच्चों को बिना किसी अतिरिक्त मानसिक परेशानी के अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों को प्राथमिकता देकर न्याय तक उनकी पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा।

निगरानी और मूल्यांकन की भी होगी व्यवस्था
न्याय विभाग संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वय से योजना का क्रियान्वयन करेगा। एफटीएससी डैशबोर्ड, नियमित प्रगति रिपोर्ट और व्यय विवरण के माध्यम से अदालतों के कामकाज की निगरानी की जाएगी। उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ समय-समय पर समीक्षा भी होगी।
केंद्र सरकार का मानना है कि योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने और अदालतों की संख्या बढ़ाने से दुष्कर्म एवं पॉक्सो मामलों के लंबित प्रकरणों में कमी आएगी। साथ ही महिलाओं और बच्चों को समयबद्ध न्याय मिलने के साथ न्याय व्यवस्था में उनका विश्वास भी मजबूत होगा।
