चावल और धान के भंडार की जानकारी हर शुक्रवार पोर्टल पर देनी होगी, नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

केंद्र सरकार ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, बड़ी खुदरा कंपनियों और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए जारी किए निर्देश

केंद्र सरकार ने देश में चावल और धान की उपलब्धता बनाए रखने, कीमतों पर नियंत्रण रखने तथा जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से व्यापारियों और थोक विक्रेताओं सहित भंडारण से जुड़ी सभी इकाइयों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चावल और धान का भंडार रखने वाली इकाइयों को प्रत्येक शुक्रवार खाद्य भंडार पोर्टल पर अपने स्टॉक की जानकारी देनी होगी। यह व्यवस्था सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, इस निर्देश के दायरे में व्यापारी, थोक विक्रेता, बड़ी खुदरा कंपनियां और चावल प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हैं। संबंधित इकाइयों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने के साथ अपने पास उपलब्ध चावल और धान के भंडार का सही तथा अद्यतन विवरण नियमित रूप से दर्ज करना होगा। सरकार का उद्देश्य बाजार में खाद्यान्न की वास्तविक उपलब्धता का आकलन करना और आपूर्ति व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी रखना है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाद्य भंडार पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने, भंडार की जानकारी नहीं देने अथवा निर्धारित भंडारण सीमा का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि नियमित स्टॉक रिपोर्टिंग से बाजार में अनावश्यक भंडारण और जमाखोरी की आशंका पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे चावल की उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चावल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के पांच राज्यों—आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना में धान तथा चावल के भंडारण पर सीमा निर्धारित करने की सहमति दी है। यह सीमा अगले वर्ष 31 जनवरी तक प्रभावी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और भंडारण के माध्यम से कीमतों को प्रभावित करने की संभावनाओं पर अंकुश लगाना है।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत ई-नीलामी के माध्यम से बेचे जाने वाले चावल की मात्रा में भी बड़ी वृद्धि की है। पहले इसके तहत 25 लाख मीट्रिक टन चावल बिक्री के लिए निर्धारित था, जिसे दोगुना करके 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खुले बाजार में चावल की अतिरिक्त उपलब्धता बढ़ने से आपूर्ति को मजबूत करने और बाजार कीमतों पर दबाव कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

खुले बाजार बिक्री योजना के माध्यम से केंद्र सरकार खाद्यान्न का एक हिस्सा निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाजार में उपलब्ध कराती है। इससे निजी व्यापारियों, थोक खरीदारों और प्रसंस्करण इकाइयों को चावल प्राप्त करने का अवसर मिलता है तथा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलती है।

सरकार के इन कदमों का व्यापक उद्देश्य चावल की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। नियमित स्टॉक विवरण, निर्धारित भंडारण सीमा और खुले बाजार में अतिरिक्त चावल की बिक्री के माध्यम से सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के साथ खाद्यान्न बाजार में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *