अमेरिका-ईरान के सैन्य हमले रुकने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत तक गिरावट

ब्रेंट क्रूड 90.87 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 84.14 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, तनाव कम होने से बाजार को मिली राहत

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026। अमेरिका और ईरान द्वारा सप्ताहांत में सैन्य हमले रोकने के बाद वैश्विक कच्चे तेल बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम होने के संकेतों के बाद निवेशकों की चिंता कम हुई और कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

समाचार एजेंसी न्यूज ऑन एयर के अनुसार, दिन के कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.1 प्रतिशत गिरकर 90.87 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 84.14 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब पिछले दिनों अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। बाजार में यह आशंका बनी हुई थी कि यदि दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस आशंका के चलते तेल की कीमतों में तेजी देखी गई थी।

हालांकि, सप्ताहांत में दोनों देशों की ओर से सैन्य हमले रोकने के बाद बाजार में राहत का माहौल बना है। ईरान की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि यदि अमेरिका अपना सैन्य अभियान रोक देता है, तो वह आगे और हमले नहीं करेगा। इन संकेतों से निवेशकों को उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने की दिशा में आगे बातचीत और कूटनीतिक प्रयास हो सकते हैं।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर पड़ता है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में किसी भी तरह के सैन्य तनाव या संघर्ष से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आती है। इसके विपरीत, तनाव कम होने और आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद से कीमतों में गिरावट देखी जाती है।

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव में कमी को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति कायम रहती है और क्षेत्र में तेल उत्पादन तथा आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। तेल आयात करने वाले देशों के लिए कम कीमतें राहत देने वाली होती हैं, क्योंकि इससे आयात बिल और परिवहन लागत पर दबाव कम हो सकता है। इसके अलावा, इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका प्रभाव कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव की आगे की स्थिति पर बनी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और कम होता है तथा क्षेत्र में स्थिरता लौटती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आने की संभावना बन सकती है। वहीं, किसी नए सैन्य घटनाक्रम से बाजार में एक बार फिर अस्थिरता और कीमतों में तेजी देखी जा सकती है।

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