पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हिंसा पर मानवाधिकार संगठन ने OHCHR से हस्तक्षेप की मांग की

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में बढ़ती अशांति और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच एक मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन ने क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामले की जांच की मांग की है।

मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। संगठन के अनुसार, 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के शांतिपूर्ण मार्च के दोबारा शुरू होने के बाद हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों की मांगों और आंदोलन को दबाने के लिए कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया, जिसके बाद क्षेत्र में हिंसा भड़क उठी।

संगठन का दावा है कि गोलीबारी की घटनाओं में 40 से अधिक नागरिकों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र और निष्पक्ष पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

13 निजी स्कूलों का पंजीकरण रद्द

इस बीच, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में प्रशासन द्वारा 13 निजी स्कूलों का पंजीकरण रद्द किए जाने की खबर भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इन स्कूलों के प्रबंधन, कर्मचारियों और छात्रों ने क्षेत्र में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। इसके बाद प्रशासन ने कथित तौर पर इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि स्कूलों के खिलाफ की गई कार्रवाई नागरिक स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। संगठन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने वाले नागरिकों और संस्थानों पर कार्रवाई कर असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

क्षेत्र में कर्फ्यू और संचार पर पाबंदी

विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र के कई हिस्सों में कर्फ्यू और सख्त नाकाबंदी लागू होने की बात कही जा रही है। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण स्थानीय लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने और घटनाओं की जानकारी बाहर पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में घटनाओं की स्वतंत्र जानकारी सामने आना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

मानवाधिकार संगठन ने OHCHR से अपील की है कि वह क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का संज्ञान ले और नागरिकों के खिलाफ कथित हिंसा तथा दमन की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाज को हिंसा या दमन के जरिए दबाया नहीं जाना चाहिए।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। मौजूदा विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर क्षेत्र में मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय इस अपील पर क्या कदम उठाता है और क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने के लिए क्या पहल की जाती है।

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