लेह, 13 अगस्त 2026। लेह स्थित राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान की निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेत को लद्दाख में पारंपरिक सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली के संरक्षण, संवर्धन और विकास में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए वर्ष 2025 का केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख राज्य पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान लद्दाख की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को संरक्षित करने और उसे आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने के प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के राज्य पुरस्कार समारोह में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने डॉ. पद्मा गुरमेत को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। समारोह में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान, उत्कृष्ट सेवा और समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली 36 विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि राज्य पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित करने का माध्यम हैं, जिनकी निष्ठा, उत्कृष्टता और समर्पित सेवा ने समाज पर सार्थक प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि इन सम्मान से समाज में सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिलता है और नई पीढ़ी को भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।
उपराज्यपाल ने युवाओं से केंद्र शासित प्रदेश के विकास और जनकल्याण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज और क्षेत्र के विकास में योगदान देने वाले लोगों का सम्मान अन्य लोगों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
सोवा-रिग्पा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. पद्मा गुरमेत को दिया गया यह सम्मान राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के लिए भी गौरव का विषय है। लद्दाख की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में सोवा-रिग्पा का महत्वपूर्ण स्थान है। यह चिकित्सा पद्धति लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल की पारंपरिक व्यवस्था का हिस्सा रही है।
डॉ. गुरमेत ने सोवा-रिग्पा चिकित्सा के संरक्षण, संवर्धन, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में लगातार काम किया है। उनके प्रयासों का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को सुरक्षित रखने के साथ-साथ इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा है। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान इस पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के अध्ययन, प्रशिक्षण और विकास की दिशा में कार्य कर रहा है।
यह पुरस्कार सोवा-रिग्पा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को व्यापक स्तर पर मिली मान्यता के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे लद्दाख की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

संस्थान में खुशी का माहौल
डॉ. पद्मा गुरमेत को प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों ने प्रसन्नता व्यक्त की। सभी ने उन्हें बधाई देते हुए सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली के विकास और उन्नति के लिए उनके समर्पित प्रयासों की सराहना की।
संस्थान से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई कि यह सम्मान डॉ. गुरमेत को सोवा-रिग्पा के संरक्षण और विकास के लिए आगे भी इसी तरह समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देगा। साथ ही, यह सम्मान लद्दाख की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
