नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से मिलकर आगे आने की अपील की है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक लड़ाई का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे महिलाओं को सम्मान और समान अवसर देते हुए लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास और नीतियों को आकार देने में महिलाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि देश की नीति निर्माण और विकास यात्रा में बराबर की भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तीकरण को देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि जब महिलाओं को समान अवसर और निर्णय लेने की शक्ति मिलती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े इस विषय को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व लोकतंत्र में उनकी भागीदारी को और व्यापक बनाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आपसी सहमति और सहयोग के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत की महिलाएं आज शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रशासन, उद्योग, कृषि, खेल और अंतरिक्ष सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में देश की राजनीतिक और नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी को और मजबूत किया जाना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री की अपील ऐसे समय में सामने आई है जब महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा होती रही है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिक समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि महिला आरक्षण के उद्देश्य को व्यापक राष्ट्रीय हित के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मानजनक और समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना केवल किसी एक दल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने इस विषय पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की बेटियों और महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक स्थान मिलने से भारत की लोकतांत्रिक शक्ति और मजबूत होगी तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका और प्रभावी होगी।

प्रधानमंत्री का यह आह्वान राजनीतिक दलों के बीच महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी दलों से मिलकर आगे बढ़ने और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है।
