सूर्यपथ तिरंगा ने रचा इतिहास, 54 मिशनों और पोस्टों से गुजरते हुए महाद्वीपों के पार पहुंचा भारतीय तिरंगा

नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026। भारत के स्वतंत्रता दिवस के वैश्विक समारोह में ‘हर घर तिरंगा 2026’ की विशेष पहल ‘सूर्यपथ तिरंगा’ ने राष्ट्रीय ध्वज की भावना को महाद्वीपों के पार पहुंचाते हुए एक अनूठा वैश्विक रिले पूरा किया। उगते सूर्य के पथ का अनुसरण करते हुए भारतीय तिरंगा 19 घंटे से अधिक समय तक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 54 भारतीय मिशनों और पोस्टों से होकर गुजरा। इस दौरान विभिन्न देशों में तिरंगा फहराया गया और भारतीय समुदायों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रमों में भाग लिया।

‘सूर्यपथ तिरंगा’ की शुरुआत फिजी की राजधानी सुवा में भारतीय समयानुसार रात करीब डेढ़ बजे हुई। इसके बाद तिरंगा लगातार सूर्य के पथ के अनुरूप आगे बढ़ता हुआ न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया गणराज्य, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और म्यांमार सहित कई देशों तक पहुंचा।

इसके बाद यह वैश्विक रिले बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव से होकर आगे बढ़ी। मध्य और पश्चिम एशिया में उज्बेकिस्तान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब में भारतीय मिशनों और पोस्टों ने तिरंगा फहराकर इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाया।

तिरंगे की यात्रा इसके बाद अफ्रीका और यूरोप तक पहुंची। इथियोपिया, रूस, केन्या, इजरायल, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में आयोजित कार्यक्रमों ने इस वैश्विक रिले को नई कड़ी दी। यूरोप में लातविया, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, मोरक्को और आइसलैंड तक तिरंगा पहुंचा।

अटलांटिक महासागर पार करने के बाद ‘सूर्यपथ तिरंगा’ अमेरिका महाद्वीप में प्रवेश कर गया। ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद और टोबैगो, डोमिनिकन गणराज्य, अमेरिका, कोलंबिया, कनाडा, जमैका, पेरू और मैक्सिको में तिरंगा फहराया गया। इस ऐतिहासिक रिले का निर्धारित अंतिम पड़ाव सैन फ्रांसिस्को रहा, जहां भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे तिरंगा पहुंचा।

देशभक्ति के साझा स्वर से गूंजे विदेशी मिशन

‘सूर्यपथ तिरंगा’ की सबसे खास विशेषताओं में से एक विभिन्न देशों में आयोजित समारोहों में सामूहिक सांस्कृतिक भागीदारी रही। तिरंगा फहराए जाने के साथ कई भारतीय मिशनों और पोस्टों पर ‘वंदे मातरम्’ तथा ‘जन गण मन’ का सामूहिक गायन किया गया। भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, अधिकारियों और भारत के मित्रों ने इन कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस पहल को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया। इससे स्वतंत्रता दिवस के वैश्विक आयोजनों में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव की भावना और मजबूत हुई।

एक तिरंगा, एक यात्रा और एक वैश्विक भाव

सूर्यपथ तिरंगा ने प्रशांत क्षेत्र से लेकर एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक अलग-अलग समय क्षेत्रों में हो रहे स्वतंत्रता दिवस समारोहों को एक सूत्र में पिरोया। प्रशांत क्षेत्र में दिन की पहली किरण के साथ शुरू हुई यह यात्रा उत्तरी अमेरिका के शाम के आकाश तक पहुंची। इस तरह तिरंगा प्रतीकात्मक रूप से सूर्य के साथ आगे बढ़ता रहा और भारत की एकता, गौरव, विरासत तथा वैश्विक उपस्थिति का संदेश देता रहा।

यह पहल विदेशों में बसे भारतीय समुदाय और भारत के बीच भावनात्मक संबंधों को भी रेखांकित करती है। अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीयों ने तिरंगे के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी मातृभूमि से जुड़ाव और राष्ट्रीय गौरव की भावना व्यक्त की।

‘सूर्यपथ तिरंगा’ का पहला वैश्विक रिले अब संपन्न हो चुका है। यह केवल तिरंगे की भौगोलिक यात्रा नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बसे भारतीयों को राष्ट्रीय भावना के एक सूत्र में जोड़ने वाली प्रतीकात्मक यात्रा बन गई। जिस प्रकार सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ता है, उसी प्रकार भारतीय तिरंगा भी उसके पथ का अनुसरण करते हुए महाद्वीपों के पार भारत का गौरव, विरासत और एकता का संदेश लेकर आगे बढ़ा।

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