भारत कल नई दिल्ली में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक की मेजबानी करेगा

लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर होगा जोर; पर्यावरण सहयोग के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर चर्चा

नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026। भारत कल नई दिल्ली में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक की मेजबानी करेगा। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, वन संवर्धन और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। बैठक का मुख्य विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ रखा गया है।

पर्यावरण मंत्रियों की बैठक से पहले आज पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन पर संपर्क समूह के ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में विभिन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श होगा और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का संचालन केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव करेंगे। बैठक में ब्रिक्स देशों के पर्यावरण से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ भविष्य में सहयोग को और मजबूत करने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर रहेगा।

मंत्रालय ने कहा है कि यह बैठक ठोस चर्चा, सहमति को बढ़ावा देने और पर्यावरण सहयोग को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगी। बदलते वैश्विक पर्यावरणीय परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन और संसाधनों के टिकाऊ उपयोग जैसी चुनौतियां लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में यह बैठक अहम मानी जा रही है।

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह के लिए चार प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना, वन संवर्धन, जंगल की आग का प्रबंधन एवं आपदा लचीलापन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और अनुकूलन शामिल हैं।

सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के तहत पर्यावरण के अनुकूल उपभोग और उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया जाएगा। वहीं वन संवर्धन के क्षेत्र में वनों की सुरक्षा, पुनर्स्थापना और उनके संरक्षण से जुड़े अनुभवों को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

जंगल की आग का प्रबंधन और आपदा लचीलापन भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल है। जलवायु परिवर्तन के कारण कई क्षेत्रों में चरम मौसम की घटनाओं और वनाग्नि का जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में आपदा से निपटने की क्षमता मजबूत करने के लिए तकनीक, अनुभव और बेहतर प्रबंधन प्रणालियों को साझा करना महत्वपूर्ण होगा।

चक्रीय अर्थव्यवस्था के माध्यम से संसाधनों के अधिकतम उपयोग, पुनर्चक्रण और अपशिष्ट में कमी लाने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुरूप अनुकूलन रणनीतियों को मजबूत करने पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास होगा।

भारत की मेजबानी में होने वाली यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देने के साथ वैश्विक स्तर पर सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के लिए साझा प्रयासों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

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