नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026। कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत में ऐसे कृषि उत्पाद तैयार किए जाने चाहिए, जो वैश्विक बाजार के मानकों पर खरे उतरें। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत कृषि उपकरण और नई उत्पादन पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
शिवराज सिंह चौहान नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 97वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि उत्पादों को खेत से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का आह्वान किया है। इसके लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उनकी स्वीकार्यता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। देश में किसानों की मेहनत और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान के परिणामस्वरूप प्रमुख खाद्यान्न फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि गेहूं और चावल की वार्षिक पैदावार में करीब दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय देश के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के निरंतर प्रयासों को दिया।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां भी हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान और बदलती कृषि परिस्थितियां किसानों के लिए चुनौती बन रही हैं। ऐसे में कृषि अनुसंधान को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढालना समय की जरूरत है।
शिवराज सिंह चौहान ने जलवायु अनुकूल बीजों के विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से ऐसी फसलों और बीजों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने को कहा, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराना जरूरी है, जिससे वे कम संसाधनों में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल कर सकें।
उन्होंने आईसीएआर के वैज्ञानिकों से राज्यों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे खेत और किसान तक पहुंचना चाहिए। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक और नई कृषि पद्धतियों को किसानों तक सरल तरीके से पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
कृषि मंत्री ने कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि उपकरण किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ड्रोन, सटीक कृषि तकनीक, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से उत्पादन लागत को कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के लिए खेत से बाजार तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना होगा। किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने पर भी ध्यान देना होगा।

कृषि मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि देश की कृषि व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में अनुसंधान संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी विकास और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
