नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की है। इस सूची में 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है, जिनकी अनुमानित व्यापार क्षमता करीब 3,070 करोड़ रुपये है। मंत्रालय का यह कदम देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में भारतीय तटरक्षक बल से संबंधित 16 वस्तुएं तथा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़ी 389 वस्तुएं शामिल हैं। सूची में विभिन्न प्रकार की रक्षा सामग्री को शामिल किया गया है। इनमें लाइन रिप्लेसेबल यूनिट, उप-प्रणालियां, उप-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, विभिन्न घटक और कच्चा माल प्रमुख रूप से शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में स्वदेशी क्षमता विकसित करने के सरकार के प्रयासों को और गति प्रदान करेगी। सूची में शामिल वस्तुओं के घरेलू स्तर पर निर्माण से भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही रक्षा विनिर्माण से जुड़े घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा विदेशों से रक्षा सामग्री के आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने बताया कि सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में शामिल वस्तुओं की विस्तृत जानकारी सृजन रक्षा पोर्टल पर उपलब्ध है। रक्षा उत्पादन विभाग ने अगस्त 2020 में सृजन पोर्टल शुरू किया था। यह एक विशेष डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और सेवा मुख्यालय स्वदेशी विकास एवं उत्पादन के लिए रक्षा सामग्री से संबंधित अवसर उद्योग जगत के सामने रखते हैं।
सृजन पोर्टल के माध्यम से देश के उद्योगों को रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और उत्पाद विकसित करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक, पोर्टल शुरू होने के बाद इस वर्ष जून तक 33 हजार से अधिक रक्षा सामग्री के स्वदेशीकरण को सुगम बनाया जा चुका है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान 15,700 से अधिक रक्षा सामग्रियों का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया गया है। इससे लगभग 9,000 करोड़ रुपये के आयात प्रतिस्थापन का अनुमान है। स्वदेशीकरण की इस प्रक्रिया से देश में रक्षा उपकरणों और उनके कलपुर्जों के निर्माण की क्षमता लगातार बढ़ रही है।

सरकार का जोर रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर है। सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं की पहचान कर उनके घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। छठी सूची भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे आने वाले समय में भारतीय रक्षा उद्योग को नए बाजार और उत्पादन के अवसर मिलने की उम्मीद है।
