नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। एसिड हमलों की घटनाओं और खुले बाजार में एसिड की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या इसे और सख्त नियमों के दायरे में लाया जाना चाहिए। अदालत का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब वर्ष 2013 में जारी नियामकीय दिशानिर्देशों के बावजूद एसिड की आसान उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी एसिड हमले के पीड़ितों के लिए उचित पुनर्वास व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इसके लिए छह सप्ताह की समय-सीमा निर्धारित की है। साथ ही केंद्र सरकार से राज्यों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर एक मॉडल पुनर्वास योजना तैयार करने पर विचार करने को कहा गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि एसिड हमले के पीड़ितों के पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रस्तावित पुनर्वास उपायों में पीड़ितों के लिए मुआवजा, समुचित चिकित्सा सहायता, पुनर्वास संबंधी सेवाएं और उच्च स्तर तक मुफ्त शिक्षा जैसी सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए। इसका उद्देश्य हमले के बाद पीड़ितों को लंबे समय तक आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
एसिड हमले के मामलों में पीड़ितों को गंभीर शारीरिक चोटों के साथ लंबे समय तक चिकित्सा और पुनर्वास की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में उपचार केवल शुरुआती चिकित्सा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बार लंबे समय तक चलने वाली सर्जरी, पुनर्निर्माण उपचार और अन्य चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। इसी वजह से अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीड़ितों के लिए उपलब्ध चिकित्सा एवं पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के 24 मार्च 2026 के एक आदेश में भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एसिड हमले के पीड़ितों के इलाज के लिए उपलब्ध योजनाओं की जानकारी मांगी गई थी। अदालत ने यह जानने की जरूरत बताई थी कि सरकारी या निजी अस्पतालों में पीड़ितों को समय पर उपचार और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्यों में किस तरह की व्यवस्था मौजूद है। केंद्र सरकार से भी अपनी संबंधित योजना की जानकारी देने को कहा गया था।
ताजा निर्देश में एसिड की खुदरा बिक्री का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाहता है कि मौजूदा नियमन पर्याप्त हैं या एसिड की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित करने अथवा बिक्री की प्रक्रिया को और कड़ा करने की जरूरत है। इससे बाजार में एसिड की उपलब्धता और उसके दुरुपयोग को नियंत्रित करने की दिशा में आगे की नीति तय हो सकती है।
अदालत की पहल का व्यापक उद्देश्य एसिड हमलों की रोकथाम के साथ-साथ पीड़ितों को गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता सुनिश्चित करना है। छह सप्ताह में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से प्रस्तावित उपायों की जानकारी सामने आने के बाद इस मामले में आगे की दिशा अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

एसिड हमले समाज में महिलाओं और अन्य पीड़ितों के खिलाफ होने वाली गंभीर हिंसा के मामलों में शामिल रहे हैं। ऐसे अपराधों के बाद पीड़ितों को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्तर पर भी लंबे समय तक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश से बिक्री पर नियंत्रण और पीड़ितों के पुनर्वास, दोनों पहलुओं पर सरकारों को ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ा है।
