नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजना के तहत चिन्हित 100 जिलों में कार्यक्रमों को तेजी से लागू करने, विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और किसानों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में अधिकारियों ने योजना के तहत जिलों में चल रहे कार्यों, अब तक हुई प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी दी। शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि योजना का क्रियान्वयन केवल कागजी उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रत्यक्ष लाभ किसानों की आय, उत्पादन क्षमता और कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे में दिखाई देना चाहिए।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य देश के उन जिलों में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को गति देना है, जहां उत्पादकता, फसल विविधीकरण, सिंचाई, भंडारण, कृषि ऋण और सेवा वितरण से संबंधित चुनौतियां अधिक हैं। योजना में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं को आपस में जोड़कर जिला स्तर पर एकीकृत कृषि विकास का मॉडल तैयार करने पर जोर दिया गया है।
योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता का विस्तार करना, सिंचाई सुविधाओं और कृषि अवसंरचना में सुधार करना, किसानों की अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाना तथा शासन एवं सेवा वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाना शामिल है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों को कृषि से संबंधित योजनाओं की जानकारी और सेवाएं समय पर उपलब्ध हों। जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होने से योजनाओं के दोहराव को कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री ने जिला स्तर पर प्रदर्शन की नियमित निगरानी और परिणामों के आधार पर मूल्यांकन की आवश्यकता बताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चिन्हित जिलों में स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें क्षेत्र की प्रमुख फसलों, जल उपलब्धता, मिट्टी की स्थिति, बाजार की जरूरतों और किसानों की स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण और वित्तीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।

सरकार का मानना है कि कृषि विकास को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय सिंचाई, भंडारण, ऋण, बाजार और तकनीक जैसी पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है। इसी दृष्टिकोण के तहत 100 चिन्हित जिलों में विभिन्न योजनाओं के बेहतर अभिसरण के जरिए किसानों के लिए ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
