नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार तड़के जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। 27 घंटे की उलटी गिनती के बाद जीएसएलवी-एफ17 ने सुबह 2 बजकर 55 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। करीब 18 मिनट बाद 2,367 किलोग्राम भार वाले ईओएस-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ईओएस-05 भू-समकालिक कक्षा से प्रक्षेपित भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के रूप में इसे देश की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए विकसित किया गया है। इसरो के अनुसार, उपग्रह से प्राप्त आंकड़े और तस्वीरें विभिन्न क्षेत्रों में पृथ्वी की निगरानी तथा सेवाओं को बेहतर बनाने में उपयोगी होंगी।
ईओएस-05 से वास्तविक समय के करीब पृथ्वी की तस्वीरें उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके अनुप्रयोगों में कृषि, आपदा प्रबंधन और पृथ्वी की सतह से संबंधित निगरानी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्थिति का आकलन करने, कृषि क्षेत्र में निगरानी और विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर भू-स्थानिक जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।
इस सफल प्रक्षेपण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को बधाई दी। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह साझेदारी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत और व्यापक विस्तार दे रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मिशन की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ईओएस-05 भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को मजबूत करता है और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है। उन्होंने इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग को नवाचार, स्वदेशी क्षमताओं और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सफल प्रक्षेपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने ईओएस-05 की उन्नत इमेजिंग क्षमताओं और पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं और ऐसे मिशन वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करते हैं।
जीएसएलवी-एफ17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान है। इस मिशन की सफलता स्वदेशी प्रक्षेपण क्षमता और पृथ्वी अवलोकन तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को भी दर्शाती है।

इसरो के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईओएस-05 के माध्यम से भारत ने भू-समकालिक कक्षा से इमेजिंग की एक नई क्षमता हासिल की है। इससे भविष्य में पृथ्वी अवलोकन आधारित सेवाओं, अनुसंधान और विभिन्न राष्ट्रीय जरूरतों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।
