नई दिल्ली। नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर सितंबर में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यमों से 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। कार्यक्रम का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनभागीदारी को मजबूत करना और समाज में नशामुक्ति के प्रति सामूहिक संकल्प पैदा करना है।
इसी सिलसिले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नशीली दवाओं की रोकथाम) डॉ. संदीप रेवाजी राठौड़ की अध्यक्षता में नई दिल्ली में दो उच्च स्तरीय समन्वय बैठकें हुईं। बैठकों में देशभर में प्रस्तावित राष्ट्रीय शपथ कार्यक्रम की रूपरेखा, नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति और विभिन्न मंत्रालयों, विभागों तथा संस्थाओं के बीच समन्वय पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रत्यक्ष के साथ-साथ ऑनलाइन भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य केवल नशे के सेवन से दूर रहने का संदेश देना नहीं, बल्कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों तक पहुंचना, उन्हें उपचार और पुनर्वास की दिशा में सहायता देना तथा समाज में जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। राष्ट्रीय शपथ के माध्यम से नागरिकों में नशीले पदार्थों से दूर रहने, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के उद्देश्य से की गई थी। प्रारंभ में अभियान देश के 272 संवेदनशील जिलों पर केंद्रित था, लेकिन अब इसका विस्तार देशभर में हो चुका है। 3 सितंबर 2026 तक अभियान के तहत देशव्यापी जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 34.56 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। इनमें 13.71 करोड़ से अधिक युवा और 10.65 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
अभियान के तहत शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं, महिलाओं, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को जोड़कर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे पहले जून 2026 में आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान भी देशभर में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी देखने को मिली थी। दस दिवसीय कार्यक्रम में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जागरूकता गतिविधियों में हिस्सा लिया था।
मंत्रालय ने नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और परामर्श की सुविधा तक पहुंचाने के लिए नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 को भी प्रमुखता से प्रचारित किया है। इसके साथ ही नागरिकों को ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में स्वयंसेवक बनकर अभियान से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक सहयोग का नेटवर्क मजबूत करना है।
सरकार का जोर नशे की रोकथाम के साथ उपचार, पुनर्वास, आफ्टरकेयर और सामाजिक पुनर्स्थापन पर भी है। नशा मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी आधारित आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते हुए युवाओं को विशेष रूप से इस मुहिम का नेतृत्वकर्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत भी एक करोड़ से अधिक युवाओं ने नशामुक्ति की दिशा में सामूहिक संकल्प लिया था।

राष्ट्रीय सामूहिक शपथ के जरिए सरकार का लक्ष्य नशे के खिलाफ जागरूकता को घर-घर और समुदाय स्तर तक पहुंचाना है। अभियान के तहत नागरिकों से नशे से स्वयं दूर रहने के साथ-साथ नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता रखने और उन्हें उपचार एवं पुनर्वास के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
