नई दिल्ली, 05 सितंबर 2026। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण का अभिन्न हिस्सा है। इसका सीधा संबंध व्यक्ति की उत्पादकता, सामाजिक सहभागिता और जीवन की गुणवत्ता से है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और विभिन्न सामाजिक दबावों के बीच युवाओं और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘युवा भारत का मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत की आबादी में युवाओं और किशोरों की बड़ी हिस्सेदारी है। देश के इस महत्वपूर्ण वर्ग का स्वस्थ और सशक्त होना भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की बढ़ती चुनौती को केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित रखकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और पूरे समाज को मिलकर इसका समाधान तलाशना होगा।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ समय पर पहचान, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में मौजूद झिझक और सामाजिक कलंक के कारण कई लोग समय पर सहायता नहीं ले पाते। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बनाते हुए लोगों को बिना संकोच मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मजबूत किया है। इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और शुरुआती प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य की जांच और बुनियादी प्रबंधन की सुविधा को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाया गया है।
सरकार की टेली-मानस सेवा भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लोगों के करीब पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार टेली-मानस के माध्यम से 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। इसके तहत परामर्श के साथ जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से वीडियो परामर्श, फॉलो-अप और व्यक्तिगत उपचार सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था भी विकसित की गई है। लोग टोल-फ्री नंबर 1800-89-14416 अथवा 14416 पर संपर्क कर सकते हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही शुरुआती सहायता उपलब्ध कराना है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार यहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की स्क्रीनिंग और बुनियादी प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं में व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, पढ़ाई या काम में रुचि कम होना अथवा सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने समाज के सभी वर्गों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और इससे जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत, समय पर सहायता और सहानुभूतिपूर्ण वातावरण युवाओं को स्वस्थ एवं आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समाज की सामूहिक भागीदारी से ही मानसिक स्वास्थ्य को लेकर व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
