नई दिल्ली, 15 सितम्बर 2026। भारत में आज राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस देश के महान अभियंता, भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष 15 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन देश के विकास में इंजीनियरों के योगदान को सम्मानित करने के साथ-साथ तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विश्वेश्वरैया की प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण की दूरदृष्टि को याद करते हुए कहा कि देश के इंजीनियर अपनी रचनात्मकता, नवाचार और दृढ़ संकल्प के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कठिन चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
राजनाथ सिंह ने विश्वेश्वरैया के जीवन को उत्कृष्टता, अनुशासन, नवाचार और जनसेवा का उदाहरण बताया। वहीं अमित शाह ने उन्हें राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला महान अभियंता बताते हुए देश के इंजीनियरों को शुभकामनाएं दीं।
15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में जन्मे मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को भारत के महानतम सिविल इंजीनियरों में गिना जाता है। उन्होंने जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और सार्वजनिक आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उन्हें 1955 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे 1912 से 1918 तक मैसूर राज्य के दीवान भी रहे।
विश्वेश्वरैया की तकनीकी प्रतिभा का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण कृष्णराज सागर बांध है। कावेरी नदी पर निर्मित इस परियोजना ने सिंचाई, पेयजल और विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में मैसूर क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी। उन्होंने बांधों में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए स्वचालित स्लुइस गेट की तकनीक को भी विकसित और लागू किया। खड़कवासला जलाशय में उनके कार्य ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को स्थापित किया।
1908 में हैदराबाद में आई भीषण बाढ़ के बाद विश्वेश्वरैया ने बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था के लिए तकनीकी सुझाव दिए। उनके योगदान का प्रभाव जल आपूर्ति, सिंचाई और शहरी आधारभूत ढांचे से जुड़े अनेक क्षेत्रों में दिखाई देता है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा, औद्योगीकरण और आधुनिक संस्थानों के विकास को भी राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक माना। मैसूर में उनके कार्यकाल के दौरान औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के विकास को गति मिली।

राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस केवल एक महान अभियंता को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा को सम्मान देने का दिन भी है। आज जब देश डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, रक्षा, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में विश्वेश्वरैया की समस्या समाधान की दृष्टि, अनुशासन और नवाचार की भावना नई पीढ़ी के इंजीनियरों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
