तारा कोल ब्लॉक और पीएससी परीक्षा को लेकर भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना

रायपुर, 15 सितंबर 2026। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी और छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में बघेल ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र का जंगल जनजातीय समुदायों के जीवन का आधार है और यहां खनन से पर्यावरण तथा वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बघेल ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने की मांग की थी। उनके अनुसार, 26 जुलाई 2022 को विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग की थी। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य सरकार ने हसदेव-अरण्य में नई खदानों की आवश्यकता नहीं होने की बात कही थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ में फैला है, जिसमें 4,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र घने जंगल का बताया जा रहा है। उनका दावा है कि खनन के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी और इससे लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास हाथियों के आवागमन पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से पर्यावरण और जनजातीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।

बघेल ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी से जुड़ी कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited को मिला है, जिसे उन्होंने अडानी समूह से जुड़ी कंपनी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य के जल, जंगल और जमीन से जुड़े संसाधनों पर निजी कंपनियों का प्रभाव बढ़ा है।

पीएससी परीक्षाओं को लेकर बघेल ने 2024 और 2025 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2024 की मुख्य परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर सवाल सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सही और गलत उत्तरों के लिए समान अंक अथवा गलत उत्तर के लिए अधिक अंक दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने 2025 की पीएससी परीक्षा में 265 पदों के लिए मुख्य परीक्षा से साक्षात्कार हेतु अपेक्षित 1:3 अनुपात पर भी सवाल उठाया। बघेल के अनुसार, इस अनुपात के आधार पर 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था, जबकि 608 अभ्यर्थी ही पहुंचे। उन्होंने आयोग से स्पष्ट करने की मांग की कि शेष 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक क्यों नहीं प्राप्त कर सके।

बघेल ने मांग की कि मामले का समाधान होने तक साक्षात्कार स्थगित किया जाए और अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं साक्षात्कार से पहले उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने पुनर्मूल्यांकन, मूल्यांकनकर्ताओं के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने, मॉडल उत्तर जारी करने और साक्षात्कार में 1:3 अनुपात का पालन करने की मांग भी की।

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