रायपुर, 15 सितंबर 2026। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के शोधकर्ताओं ने एक बहुउद्देशीय स्मार्ट हाइड्रोजेल विकसित किया है, जो गर्म करने पर अपना आकार बदलने के साथ-साथ अपशिष्ट जल से विभिन्न प्रदूषकों को हटाने में भी सक्षम है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नई सामग्री भविष्य में सॉफ्ट रोबोटिक्स, स्मार्ट एक्ट्यूएटर्स और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है। शोध दल में सुदीप्ता पॉल, प्रियंक सिन्हा, अमूल जैन और डॉ. संजीब बनर्जी शामिल हैं।
इस शोध की खासियत यह है कि एक ही सामग्री में आकार-स्मृति, यांत्रिक मजबूती और जल शुद्धिकरण जैसी क्षमताओं को जोड़ा गया है। शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से डिजाइन किए गए फोर-आर्म स्टार पॉलिमर को ऐक्रेलिक एसिड, ऐक्रेलामाइड और पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल डायएक्रिलेट (PEGDA) के साथ मिलाकर हाइड्रोजेल तैयार किया। इसे पराबैंगनी-ए (UVA) प्रकाश की सहायता से तेजी से तैयार किया जा सकता है और विभिन्न संरचनाओं में ढाला जा सकता है। यह तकनीक भविष्य में प्रोग्राम किए गए आकार में परिवर्तन करने वाले स्मार्ट उपकरणों और 4D-प्रिंटेबल संरचनाओं के निर्माण की संभावनाएं बढ़ाती है।
हाइड्रोजेल की प्रमुख विशेषता इसका शेप-मेमोरी यानी आकार-स्मृति व्यवहार है। शोधकर्ताओं ने फूल जैसी संरचना के माध्यम से इसका प्रदर्शन किया। गर्म करने पर यह संरचना खुल जाती है और निर्धारित परिस्थितियों में अपने प्रोग्राम किए गए आकार में वापस आ जाती है। प्रयोगों में हाइड्रोजेल ने करीब 94 प्रतिशत शेप फिक्सिटी और 85 प्रतिशत शेप रिकवरी दर्ज की। सामग्री ने लगभग 25 सेकंड में अपने निर्धारित आकार को दोबारा प्राप्त कर लिया। बार-बार किए गए आकार परिवर्तन के चक्रों में भी इसके प्रदर्शन में स्थिरता देखी गई।
सामग्री की यांत्रिक क्षमता भी उल्लेखनीय रही। एक प्रयोग में केवल एक ग्राम सूखे हाइड्रोजेल ने 250 ग्राम के धातु भार को बार-बार उठाने की क्षमता दिखाई। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह क्षमता हल्के और ऊर्जा-कुशल सॉफ्ट एक्ट्यूएटर्स तथा रोबोटिक प्रणालियों के विकास में इसके संभावित उपयोग को दर्शाती है। ऐसी सामग्री भविष्य में ऐसे उपकरण विकसित करने में मदद कर सकती है, जो बाहरी तापमान या अन्य उत्तेजनाओं के आधार पर अपनी आकृति और कार्यप्रणाली में बदलाव कर सकें।
शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजेल की जल शुद्धिकरण क्षमता का भी परीक्षण किया। प्रयोगों में इस सामग्री ने पानी से मेथिलीन ब्लू, रोडामाइन बी और ईओसिन बी जैसे कार्बनिक रंगों के साथ-साथ विषैले लेड (Pb²⁺) आयनों को हटाने की क्षमता प्रदर्शित की। इससे औद्योगिक और अन्य अपशिष्ट जल में मौजूद कुछ प्रकार के प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए इसके संभावित उपयोग का संकेत मिलता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, आकार बदलने की क्षमता, यांत्रिक मजबूती और जल से प्रदूषकों को हटाने की क्षमता का एक ही सामग्री में संयोजन इसे बहुउद्देशीय अनुप्रयोगों के लिए संभावनाशील बनाता है। यह तकनीक अभी शोध एवं विकास के चरण में है, लेकिन भविष्य में स्मार्ट सामग्री, सॉफ्ट रोबोटिक्स और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए समाधान विकसित करने का आधार बन सकती है।

यह शोध पीयर-रिव्यू वैज्ञानिक जर्नल Small Methods में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हाइड्रोजेल प्लेटफॉर्म भविष्य में ऐसे स्मार्ट और 4D-प्रिंटेबल पदार्थों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जिनमें प्रोग्राम किए गए आकार परिवर्तन और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण जैसी क्षमताएं एक ही प्रणाली में एकीकृत हों।
