नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 16 और 17 सितंबर को भूटान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है। भूटान के विदेश एवं बाह्य व्यापार मंत्री ल्योनपो डी. एन. ढुंग्येल के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
विदेश मंत्री जयशंकर अपने भूटानी समकक्ष ल्योनपो डी. एन. ढुंग्येल के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वार्ता में दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ-साथ आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। भूटान के विदेश एवं बाह्य व्यापार मंत्रालय के अनुसार, ल्योनपो डी. एन. ढुंग्येल वर्तमान में भूटान के विदेश एवं बाह्य व्यापार मंत्री हैं।
यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर की भूटान नरेश से मुलाकात भी प्रस्तावित है। इसके अलावा वे भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे से भी भेंट करेंगे। उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के विषयों पर चर्चा होगी। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और भूटान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लगातार जारी है।
इससे पहले जुलाई 2026 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भूटान की यात्रा की थी। 30 और 31 जुलाई को हुई इस यात्रा के दौरान भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता के पांचवें दौर में दोनों देशों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, संपर्क, लोगों के बीच संबंधों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने भारत द्वारा भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना अवधि 2024-29 के लिए 10,000 करोड़ रुपये के समर्थन की प्रगति की भी समीक्षा की थी।
भारत और भूटान के संबंधों में विकास साझेदारी, जलविद्युत, व्यापार, संपर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय यात्राएं और वार्ताएं द्विपक्षीय सहयोग की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का माध्यम रही हैं।

जयशंकर की मौजूदा यात्रा से दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और मौजूदा सहयोग की समीक्षा का अवसर मिलेगा। यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों के परिणामों पर दोनों देशों की नजर रहेगी। भूटान की ओर से भी भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने पर जोर दिया जाता रहा है।
