आरएसएस की सेवा की सदी भारत की सेवा परंपरा को दर्शाती है: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक सदी की सेवा यात्रा भारत की सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की परंपरा को दर्शाती है। उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन की पुस्तक “A Century of Service – The RSS in 100 Acts of Seva” के विमोचन के अवसर पर कही। यह कार्यक्रम 15 सितंबर को आयोजित हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक में आरएसएस की 100 वर्षों की सेवा गतिविधियों, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़े योगदान को दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के अच्छे कार्यों और अनुभवों को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि समय के साथ मौखिक स्मृतियां समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज की खबर कल इतिहास बन जाती है, इसलिए महत्वपूर्ण घटनाओं और सेवा कार्यों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

उन्होंने सेवा को कर्तव्य से जोड़ते हुए कहा कि “सेवा ही धर्म है, यह एक कर्तव्य है।” उनके अनुसार, आरएसएस की सेवा गतिविधियों का विस्तार समाज के विभिन्न वर्गों तक हुआ है। उन्होंने गरीब और वंचित वर्गों के साथ मजदूरों, महिलाओं और बच्चों तक पहुंचने वाली सेवा पहलों का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए राहत कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी के कठिन दौर में जरूरतमंद लोगों तक भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाने के प्रयास किए गए। उनके अनुसार, ऐसे अनुभवों को दर्ज करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी हो सकता है।

पुस्तक में “चरित्र निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण” की अवधारणा को भी प्रमुखता दी गई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल संस्थाओं और आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए देशभक्ति, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता जैसे मूल्यों की भी आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि पुस्तक को आरएसएस की सेवा गतिविधियों के एक दस्तावेज के साथ-साथ भारत की सेवा परंपरा, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को समझने के स्रोत के रूप में भी देखा जा सकता है। उन्होंने डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन और पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी तथा इतिहास और सामाजिक कार्यों के दस्तावेजीकरण की ऐसी पहलों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमासिवायम सहित अन्य लोग मौजूद रहे। पुस्तक की लेखिका डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन भी कार्यक्रम में उपस्थित थीं।

पुस्तक विमोचन का यह कार्यक्रम आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हुआ। इसमें संगठन की सेवा गतिविधियों को पुस्तक के माध्यम से संकलित और प्रस्तुत किया गया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी पुस्तकों के माध्यम से सेवा कार्यों और सामाजिक अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकता है।

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