अहमदाबाद। तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के अन्वेषण निदेशक ओम प्रकाश सिन्हा ने कहा है कि ई-20 पेट्रोल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ई-20 को लेकर तकनीकी और परिचालन स्तर पर कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से इनके समाधान खोजे जा सकते हैं।
अहमदाबाद स्थित ओएनजीसी जलाशय अध्ययन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में सिन्हा ने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा आवश्यकता लगातार बढ़ रही है और ऐसे में देश के लिए घरेलू संसाधनों के अधिकतम उपयोग के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव ने भी ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को प्रमुख विषय बना दिया है।
ई-20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने का उद्देश्य घरेलू स्तर पर उपलब्ध जैव ईंधन का उपयोग बढ़ाना, कच्चे तेल के आयात को कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया गया। सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के बराबर आयात की जरूरत कम हुई और 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार नवंबर 2025 से जून 2026 के दौरान पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर 20 प्रतिशत रहा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईंधन मिश्रण के लिए इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल घरेलू उत्पादकों से प्राप्त किया जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञ विश्लेषण यह भी बताते हैं कि ई-20 से कच्चे तेल की मांग में कमी के बावजूद भारत की कुल तेल खपत लगातार बढ़ रही है। इसलिए पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाना आयात निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है, अकेला समाधान नहीं। भारत को इसके साथ घरेलू तेल-गैस उत्पादन, वैकल्पिक ईंधन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता पर भी समानांतर रूप से काम करना होगा।

ओएनजीसी के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई तकनीकों, बेहतर अन्वेषण, घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक है। ऐसे में ई-20 जैसे जैव ईंधन भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आए हैं।
