परीक्षा में अनुचित साधनों पर कड़ी कार्रवाई के साथ छात्रों के भविष्य की सुरक्षा पर सरकार का जोर
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के मामलों पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक न्यायालयों की व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा सुनिश्चित करने से संबंधित एक मसौदा विधेयक को मंजूरी दी गई है। सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले वीडियो संदेश के माध्यम से संकेत दिया था कि पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संसद में विधेयक लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त विधेयक लाने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द प्रभावी कानून बनाने पर जोर दिया है। रिजिजू के अनुसार, सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है और देश भी चाहता है कि परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाली अनियमितताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को संसद से पारित कराने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से भी इस महत्वपूर्ण विषय पर सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

इस बीच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। उन्होंने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। इस अवसर पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो और लेह-लद्दाख के शीर्ष निकाय के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
सोनम वांगचुक पिछले महीने की 28 तारीख से शिक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने भी उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी। लंबी बातचीत और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया।
वांगचुक ने सभी पक्षों से किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आगे भी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाया जाना जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोनम वांगचुक के बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से वांगचुक से डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या का पालन करने और जल्द से जल्द सामान्य स्वास्थ्य एवं वजन प्राप्त करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने उनके स्वस्थ रहने की कामना भी की।
पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित विधेयक और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार का यह कदम विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फास्ट-ट्रैक न्यायालयों के गठन और कड़ी सजा के प्रावधानों से पेपर लीक तथा परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे की उम्मीद है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और लाखों विद्यार्थियों के विश्वास को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
