राष्ट्रीय स्तर पर ग्राम पंचायतों की भूमिका को मजबूत करने पर जोर, बलरामपुर के कोटधी में जल जीवन मिशन से बदली पेयजल व्यवस्था
नई दिल्ली/रायपुर, 24 जुलाई 2026। जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बहुभाषी ‘सुजल ग्राम संवाद’ के 9वें संस्करण का आयोजन किया। संवाद के माध्यम से जल जीवन मिशन के तहत समुदाय के नेतृत्व वाली जल प्रबंधन व्यवस्था और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव पर जोर दिया गया। इस दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों, समुदाय के लोगों और स्थानीय स्तर पर जल व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए।

संवाद में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जल आपूर्ति व्यवस्था के संचालन और रखरखाव के साथ-साथ जल स्रोतों की सुरक्षा, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और जल संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई।
इसी संवाद के दौरान छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत कोटधी ने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के अपने अनुभव साझा किए। ग्राम प्रतिनिधियों ने बताया कि जल जीवन मिशन से गांव में सुरक्षित पेयजल तक लोगों की पहुंच बेहतर हुई है। पहले ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने में काफी समय और मेहनत करनी पड़ती थी। घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंचने से यह परेशानी काफी हद तक कम हुई है।

हर पखवाड़े पेयजल की गुणवत्ता की जांच
कोटधी ग्राम पंचायत में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समुदाय के प्रशिक्षित सदस्यों द्वारा हर पखवाड़े फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी की जांच की जाती है। जांच के परिणामों को समर्पित व्हाट्सऐप समूह के जरिए ग्रामीणों के साथ साझा किया जाता है। इससे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बनी रहती है और ग्रामीण भी सुरक्षित पानी के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
गांव में पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के साथ ग्रामीणों को पानी के जिम्मेदार उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। जल संरक्षण और गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था के रखरखाव में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।
ग्रे-वॉटर के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था
कोटधी ग्राम पंचायत में घरेलू उपयोग के बाद निकलने वाले ग्रे-वॉटर के सुरक्षित निपटान के लिए सोक पिट बनाए गए हैं। इससे गंदे पानी के उचित प्रबंधन में मदद मिल रही है और गांव में स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्राम पंचायत ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव में सहयोग के लिए 15वें वित्त आयोग के अनुदान का भी उपयोग कर रही है। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और आवश्यक रखरखाव कार्यों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

जल स्रोतों की स्थिरता पर भी विशेष ध्यान
संवाद के दौरान जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों ने जल संरक्षण तथा पेयजल स्रोतों की स्थिरता को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और आने वाले समय में भी लोगों को लगातार स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
‘सुजल ग्राम संवाद’ में यह संदेश भी सामने आया कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल घर-घर नल कनेक्शन पहुंचाने तक सीमित नहीं है। पेयजल योजनाओं का नियमित संचालन, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, जल स्रोतों का संरक्षण और समुदाय की सक्रिय भागीदारी ही ग्रामीण जल सुरक्षा को स्थायी बना सकती है।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का कोटधी गांव इसी सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां जल जीवन मिशन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के साथ-साथ जल गुणवत्ता, स्वच्छता, जल संरक्षण और योजना के दीर्घकालिक रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
