नई दिल्ली:
देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष के अक्टूबर महीने में भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह सालाना आधार पर करीब 23 प्रतिशत बढ़कर ₹2,31,000 करोड़ से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती, त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ती मांग और आयात से होने वाले कर राजस्व में तेज उछाल के कारण जीएसटी संग्रह में यह ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अनंतिम (प्रोविशनल) आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और उपभोग में आई तेजी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
घरेलू बिक्री और आयात राजस्व में जोरदार वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अक्टूबर में घरेलू लेनदेन (बिक्री) से प्राप्त सकल जीएसटी राजस्व में सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो ₹1,59,000 करोड़ से अधिक रहा।
इसके साथ ही, आयातित वस्तुओं से प्राप्त कर राजस्व में 42.2 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा ₹72,246 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयातित वस्तुओं की मांग में आई यह तेजी देश के विनिर्माण और व्यापारिक परिदृश्य के सकारात्मक माहौल को प्रदर्शित करती है।
कर घटकों का विवरण (करवार विभाजन)
कुल सकल जीएसटी संग्रह के विभिन्न घटकों का विवरण इस प्रकार है:
- केंद्रीय जीएसटी (CGST): ₹42,935 करोड़
- राज्य जीएसटी (SGST): ₹51,340 करोड़
- एकीकृत जीएसटी (IGST): ₹1,03,715 करोड़ (आयात से प्राप्त राजस्व सहित)
- उपकर (Cess): अनुपूरक घटकों का योगदान
जीएसटी रिफंड और शुद्ध राजस्व संग्रह
पिछले महीने जीएसटी रिफंड (कर वापसी) दावों के निपटान में भी तेजी देखने को मिली। अक्टूबर में रिफंड भुगतान सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत बढ़कर ₹27,934 करोड़ हो गया।
रिफंड के समायोजन के बाद, अक्टूबर महीने के लिए शुद्ध जीएसटी (Net GST) राजस्व सालाना आधार पर 25.6 प्रतिशत बढ़कर ₹2,03,000 करोड़ के पार पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की इसी अवधि में शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,61,000 करोड़ से अधिक दर्ज किया गया था।

अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?
विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन की शुरुआत और उपभोक्ता विश्वास में सुधार ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। कर अनुपालन (Tax Compliance) में सुधार, तकनीक-आधारित कर प्रशासन, और चोरी रोकने के उपायों ने भी राजस्व संग्रह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद की है। जीएसटी संग्रह का यह रुझान चालू वित्त वर्ष में भारत की राजकोषीय स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करेगा।
