चार लेन और उससे अधिक के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अब बिना रुके गुजरेंगे वाहन, NHAI ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली से टोल प्लाजा पर जाम और प्रतीक्षा समय होगा कम, ईंधन की बचत के साथ यात्रा बनेगी अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक

नई दिल्ली, 07 नवंबर 2026। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्राधिकरण ने चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा के डिजाइन, निर्माण और सुविधाओं को एक समान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका प्रमुख उद्देश्य मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली को लागू करना है, जिसके अंतर्गत वाहनों को टोल भुगतान के लिए निर्धारित प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों, यातायात जाम और प्रतीक्षा समय को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वाहन चालकों को अधिक सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। लगातार रुकने और दोबारा गति पकड़ने की आवश्यकता कम होने से ईंधन की बचत होगी तथा वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है।

टोल प्लाजा की बनावट और सुविधाओं के लिए समान मानक

NHAI के नए दिशा-निर्देशों में टोल प्लाजा की संरचना, लेन की व्यवस्था, प्रवेश एवं निकास मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, यातायात संकेतक और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए एक समान मानक निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।

इन मानकों के तहत टोल प्लाजा के डिजाइन में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि वाहनों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे और सड़क पर किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। इसके अलावा संकेतकों और प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि रात के समय तथा अधिक यातायात वाले मार्गों पर भी वाहन सुरक्षित तरीके से गुजर सकें।

मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक से होगा टोल संग्रह

मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह तकनीक पर आधारित है। इसमें टोल भुगतान के लिए वाहनों को किसी विशेष बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होती। राजमार्ग पर लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) की सहायता से गुजरने वाले वाहनों की पहचान की जा सकती है। इसके साथ ही रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक के माध्यम से वाहन से जुड़े फास्टैग की पहचान कर टोल राशि का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किया जा सकता है।

इस व्यवस्था में वाहन सामान्य गति से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे। इससे टोल संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनने के साथ मानवीय हस्तक्षेप भी कम होगा।

नई और मौजूदा परियोजनाओं में लागू होंगे दिशा-निर्देश

मंत्रालय के अनुसार, नए दिशा-निर्देश राष्ट्रीय राजमार्गों की आगामी परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा राजमार्ग परियोजनाओं में भी लागू किए जाएंगे। इससे भविष्य में विकसित होने वाले राजमार्गों पर शुरुआत से ही आधुनिक टोल व्यवस्था की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। मौजूदा टोल प्लाजा को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

डिजिटल राजमार्ग व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल तकनीक के माध्यम से यातायात और टोल संग्रह को अधिक प्रभावी बनाने पर लगातार जोर दे रही है। फास्टैग व्यवस्था के बाद मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली को टोल संग्रह की अगली महत्वपूर्ण तकनीकी पहल माना जा रहा है।

NHAI की इस पहल से यात्रियों का समय बचाने, ईंधन की खपत कम करने, यातायात प्रबंधन सुधारने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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