मानसून और अल नीनो के कृषि पर असर की लगातार निगरानी, 342 जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं अपडेट

नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि मानसून की बदलती स्थिति और अल नीनो के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की लगातार निगरानी की जा रही है। मौसम विभाग के समन्वय से वर्षा की स्थिति, मौसम में होने वाले बदलाव और खेती पर उनके संभावित प्रभावों का नियमित आकलन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने और कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से रोकने के लिए आवश्यक तैयारियां पहले से की जा रही हैं।

कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि जिन 342 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है, उन 15 राज्यों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं को अद्यतन किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में किसानों को समय पर आवश्यक सलाह और सहायता उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, मानसून की स्थिति कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वर्षा की मात्रा और उसके वितरण में बदलाव का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई, फसल वृद्धि और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में मौसम विभाग से प्राप्त पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि विभाग और संबंधित संस्थाएं संभावित परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति तैयार कर रही हैं।

अल नीनो के जोखिम को कम करने की तैयारी

रामनाथ ठाकुर ने बताया कि अल नीनो से संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की हैं। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्रों को मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल प्रबंधन और किसानों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

अल नीनो की स्थिति में वर्षा के स्वरूप में बदलाव की संभावना रहती है। इसका प्रभाव खेती, जल उपलब्धता और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार ने स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किसानों को वैकल्पिक कृषि पद्धतियों और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए तैयार करने पर जोर दिया है।

बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित

सरकार ने किसानों के लिए बीजों की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। राज्यों की 172 लाख क्विंटल से अधिक की मांग के मुकाबले पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसम की परिस्थितियों के कारण किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसल चयन और बुवाई का समय महत्वपूर्ण हो जाता है। जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल और कृषि गतिविधियों से संबंधित सुझाव उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर

सरकार ने जल उपलब्धता को लेकर भी राज्यों को अग्रिम तैयारी करने की सलाह दी है। केंद्रीय जल आयोग और राज्य सरकारों को जलाशयों में उपलब्ध पानी के अधिकतम एवं कुशल उपयोग के लिए पहले से योजना बनाने को कहा गया है। इसके साथ ही किसानों के बीच कुशल सिंचाई पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि सीमित जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कृषि क्षेत्र को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली सिंचाई तकनीकों को अपनाने और उपलब्ध जल का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य बदलते मौसम और संभावित अल नीनो प्रभावों के बीच किसानों को समय पर जानकारी, बीज, सिंचाई और कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराना है। सरकार और संबंधित कृषि संस्थाएं मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुसार रणनीति में बदलाव करने की तैयारी में हैं।

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